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ईडी समन अवहेलना मामले में CM हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका, याचिका हुई खारिज

On: January 15, 2026 6:29 PM
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रांची: रांची के बड़गाईं अंचल से जुड़े कथित जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जारी समनों की अवहेलना से जुड़े केस में राहत की उम्मीद लगाए बैठे मुख्यमंत्री को फिलहाल निराशा हाथ लगी है।


जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने इस मामले में एमपी-एमएलए विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से पहले ही छूट प्रदान कर दी है, जिससे उन्हें आंशिक राहत जरूर मिली है।


ईडी की शिकायत पर शुरू हुई थी न्यायिक प्रक्रिया


दरअसल, ईडी ने फरवरी 2024 में रांची के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ शिकायतवाद दर्ज कराया था। एजेंसी का आरोप है कि कथित जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए उन्हें कई बार समन भेजे गए, लेकिन उन्होंने अधिकांश समनों की अनदेखी की।


ईडी के मुताबिक, कुल 10 बार समन जारी किए गए, लेकिन मुख्यमंत्री केवल दो समनों पर ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
पीएमएलए और आईपीसी की धाराओं के उल्लंघन का आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि बार-बार समन के बावजूद उपस्थित नहीं होना प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 63 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174 का उल्लंघन है। इसी आधार पर सीजेएम कोर्ट ने 4 मार्च 2024 को ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिया था। बाद में यह मामला एमपी-एमएलए विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।


हाईकोर्ट में क्या थी हेमंत सोरेन की दलील


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिन समनों पर वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, उन सभी का लिखित जवाब ईडी को भेजा गया था। इसके अलावा, पुराने समन लैप्स होने के बाद जारी किए गए नए समनों पर उन्होंने हाजिरी दी और जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन किया।


हेमंत सोरेन का यह भी कहना था कि ईडी ने दुर्भावना से प्रेरित होकर अनावश्यक रूप से बार-बार समन जारी किए, जबकि वे जांच में सहयोग कर रहे थे। इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करना कानून का दुरुपयोग है।


हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया और एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री को निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से पहले ही छूट मिलेगी, जिससे उन्हें फिलहाल अदालत में पेशी को लेकर राहत मिल गई है।


अब इस मामले में आगे की कार्यवाही एमपी-एमएलए विशेष अदालत में होगी, जहां ईडी की शिकायत पर सुनवाई जारी रहेगी।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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