बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। जिले में एक साथ 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया। सरेंडर करने वाले माओवादियों में 49 नक्सलियों पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सभी नक्सली साउथ सब जोनल ब्यूरो (SSZB) से जुड़े बताए जा रहे हैं और राज्य शासन की नई पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने हथियार डाले हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिला और 31 पुरुष नक्सली शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इनमें DKSZC के साथ-साथ आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) डिवीजन और भैरमगढ़ एरिया कमेटी से जुड़े कैडर भी शामिल हैं। यह सरेंडर राज्य में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बीजापुर एसपी ने बताया कि राज्य सरकार की शांति, संवाद और विकास पर आधारित व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखने लगे हैं। इन्हीं सतत प्रयासों के चलते 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
इनामी नक्सलियों का विवरण
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य लक्खू कारम उर्फ अनिल (32), प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य लक्ष्मी माडवी (28) और चिन्नी सोढ़ी उर्फ शांति (28) शामिल हैं, जिन पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा 13 अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, 19 कैडरों पर दो-दो लाख रुपये और 14 कैडरों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। कुल मिलाकर 52 में से 49 नक्सलियों पर 1.41 करोड़ रुपये का इनाम था।
सरेंडर नीति के तहत मदद और पुनर्वास
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए शिक्षा, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बीजापुर में लगातार कमजोर हो रहा नक्सली नेटवर्क
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 824 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसी अवधि में 1,126 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि विभिन्न मुठभेड़ों में 223 माओवादी मारे गए हैं। यह आंकड़े जिले में नक्सल नेटवर्क के लगातार कमजोर होने का संकेत देते हैं।
पड़ोसी जिलों में भी सरेंडर का सिलसिला
बीजापुर के अलावा आसपास के जिलों में भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला जारी है। बुधवार को सुकमा जिले में 29 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इससे पहले 8 जनवरी को दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने हथियार डाले थे, जबकि 7 जनवरी को सुकमा में 26 नक्सली हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुए थे।
नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक राज्य में 1,500 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया है। बीजापुर में हुआ यह सामूहिक सरेंडर उसी दिशा में एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।














