नई दिल्ली: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 को लेकर बांग्लादेश की भागीदारी पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत अगले महीने 7 फरवरी से होनी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बांग्लादेशी टीम भारत आकर टूर्नामेंट में हिस्सा लेगी या नहीं। इस अनिश्चितता ने आईसीसी, मेजबान भारत और क्रिकेट फैंस की चिंता बढ़ा दी है।
इस गतिरोध को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को शनिवार को ढाका भेजने की योजना बनाई थी। इस प्रतिनिधिमंडल का मकसद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से सीधी बातचीत कर सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े मसलों पर भरोसा कायम करना था।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरे में भी बांग्लादेश की ओर से अड़चन पैदा हो गई।
आईसीसी के जिन दो अधिकारियों को ढाका जाना था, उनमें एक भारतीय मूल के अधिकारी भी शामिल थे। उनके साथ आईसीसी एंटी-करप्शन यूनिट और सिक्योरिटी प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव को भी यात्रा करनी थी। लेकिन बांग्लादेश की ओर से भारतीय मूल के अधिकारी को वीज़ा देने में देरी की गई, जिसके चलते तय कार्यक्रम प्रभावित हुआ। अंततः केवल एंड्रयू एफग्रेव ही ढाका पहुंच पाए।
इस घटनाक्रम के बाद अब आईसीसी और बीसीबी के बीच होने वाली पूरी बातचीत का दारोमदार एंड्रयू एफग्रेव पर आ गया है। पूर्व ब्रिटिश पुलिस अधिकारी रहे एफग्रेव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मामलों का गहरा अनुभव है। वे बांग्लादेशी अधिकारियों के सामने भारत में प्रस्तावित विस्तृत सुरक्षा योजना प्रस्तुत करेंगे, ताकि बांग्लादेशी टीम को मिलने वाली सुरक्षा को लेकर उनके संदेह दूर किए जा सकें।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की प्रमुख चिंता खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर बताई जा रही है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और राजनीतिक तनावों के बीच बीसीबी किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। आईसीसी की कोशिश है कि भारत में मैचों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यात्रा प्रबंधन, होटल सुरक्षा और स्टेडियम प्रोटोकॉल की पूरी तस्वीर सामने रखकर बांग्लादेश को आश्वस्त किया जाए।
टी20 विश्व कप की शुरुआत में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। ऐसे में आईसीसी पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह जल्द से जल्द इस मसले का समाधान निकाले। अगर बांग्लादेश की भागीदारी पर अंतिम फैसला समय पर नहीं हो पाया, तो इसका असर टूर्नामेंट के शेड्यूल, ग्रुप समीकरण और व्यावसायिक योजनाओं पर भी पड़ सकता है।














