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पलामू: राजहरा कोलियरी से 16 साल बाद शुरू हुआ उत्पादन, कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने किया उद्घाटन

On: January 17, 2026 6:33 PM
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पलामू: जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सीसीएल की ऐतिहासिक राजहरा कोलियरी में शनिवार को 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दोबारा कोयला उत्पादन की शुरुआत हो गई। वर्ष 2010 से बंद पड़ी इस कोलियरी के पुनः संचालन को क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने विधिवत रूप से कोयला उत्पादन कार्य का उद्घाटन किया।


इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि भारत को कोयला उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि देश में कोयले का उत्पादन बढ़ाकर न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा किया जाएगा, बल्कि भविष्य में दूसरे देशों को भी कोयला निर्यात किया जाएगा। यह आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है।
उन्होंने बताया कि राजहरा कोलियरी लंबे समय से बंद पड़ी थी और इसके पुनः संचालन के लिए कोयला मंत्रालय के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निरंतर प्रयास किए। केंद्रीय मंत्री ने पलामू सांसद विष्णु दयाल राम और सांसद बीडी राम की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि वर्षों से ठप पड़ी यह कोलियरी फिर से शुरू हो सकी।


सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने 2014 से पहले और उसके बाद की स्थितियों की तुलना करते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद कोयला, ऊर्जा, सड़क, रेलवे सहित हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। कोयला देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ है और इससे लाखों लोगों की जिंदगी रोशन होती है।
पर्यावरण को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ग्रीन एनर्जी को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां विकास कार्यों के लिए जंगल या पहाड़ हटाने की आवश्यकता पड़ती है, वहां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए दोगुने पौधे लगाए जा रहे हैं।


वहीं पलामू सांसद बीडी राम ने कहा कि राजहरा कोलियरी के पुनः संचालन से आसपास के क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने बताया कि खदान के शुरू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


गौरतलब है कि राजहरा कोलियरी की स्थापना वर्ष 1842 में हुई थी और यह देश की सबसे पुरानी कोलियरियों में से एक मानी जाती है। डायरेक्टर जनरल माइंस एंड सेफ्टी (DGMS) की गाइडलाइंस के आधार पर वर्ष 2010 में यहां उत्पादन कार्य बंद कर दिया गया था। अब एक बार फिर इस ऐतिहासिक कोलियरी से कोयला उत्पादन शुरू हो गया है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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