रांची: झारखंड में संचालित कोचिंग संस्थानों पर अब सख्त निगरानी और नियंत्रण होगा। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को ‘झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2025’ को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही यह विधेयक अब विधिवत कानून बन गया है। राज्य विधानसभा ने इसे अगस्त 2025 में पारित किया था।
नए कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, नियंत्रण, फीस निर्धारण और न्यूनतम शैक्षणिक एवं भौतिक मानकों को सुनिश्चित करना है। इसके जरिए विद्यार्थियों के हितों की रक्षा, उनकी सुरक्षा और कोचिंग सेक्टर में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया है।
50 से अधिक छात्रों वाले संस्थान कानून के दायरे में
यह कानून राज्य में उन सभी कोचिंग संस्थानों पर लागू होगा, जहां 50 से अधिक छात्र नामांकित हैं। इसके तहत संस्थानों को अलग से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के संचालन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
सख्त प्रावधान और नियम
कानून के तहत कोचिंग संस्थानों पर कई अहम शर्तें लागू की गई हैं
• कोचिंग सेंटर को 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी होगी
• 1000 से अधिक छात्रों वाले संस्थानों में मनोचिकित्सक (Psychologist) की नियुक्ति अनिवार्य
• फीस, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की जानकारी और आधारभूत संरचना का पूरा विवरण
• रेगुलेटरी कमेटी और संस्थान की वेबसाइट/पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड करना होगा
• नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, पंजीकरण रद्द और ब्लैकलिस्टिंग तक की कार्रवाई की जा सकेगी
बच्चों और अभिभावकों के हितों पर विशेष जोर
नए कानून में नाबालिग विद्यार्थियों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों के नामांकन से पहले अभिभावक की लिखित सहमति आवश्यक होगी। छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के निपटारे के लिए हर कोचिंग सेंटर में शिकायत निवारण सेल का गठन अनिवार्य होगा।
बुनियादी सुविधाओं के लिए तय मानक
कानून के अनुसार प्रत्येक छात्र को बैठने के लिए कम से कम एक वर्ग मीटर स्थान उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा, कोचिंग संस्थान सुबह 6 बजे से पहले और रात 9 बजे के बाद संचालित नहीं किए जा सकेंगे।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की पहल
सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगेगी, फीस संरचना पारदर्शी होगी और छात्रों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
नए कानून को शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे झारखंड में कोचिंग सेक्टर अधिक जवाबदेह और अनुशासित होगा।











