फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां चार साल की एक मासूम बच्ची को केवल इसलिए अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि वह 50 तक उल्टी गिनती सही ढंग से नहीं लिख पा रही थी। आरोप है कि पिता ने गुस्से में आकर बच्ची को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
यह दर्दनाक वारदात झाड़सेंतली गांव की है। बच्ची अपने माता-पिता और दो भाई-बहनों के साथ यहां किराये के मकान में रहती थी।
अस्पताल पहुंचते ही खुली सच्चाई
घटना का खुलासा तब हुआ जब आरोपी पिता बच्ची को बेहोशी की हालत में बीके अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में पिता ने अस्पताल प्रशासन को बताया कि बच्ची खेलते समय सीढ़ियों से गिर गई थी।
हालांकि, जब बच्ची की मां रंजीता अस्पताल पहुंची तो उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान देखकर उसे पिता की कहानी पर शक हुआ। बाद में घर पर मौजूद सात वर्षीय बेटे ने भी अपनी मां को बताया कि पिता ने उसकी बहन की पिटाई की थी।
पढ़ाई के नाम पर की गई बेरहमी
पुलिस जांच में सामने आया है कि बच्ची का नाम वंशिका था। आरोपी पिता कृष्णा जयसवाल (31), जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के खेरटिया गांव का रहने वाला है, दिन के समय बच्चों की देखरेख करता था। उसी दौरान वह बच्ची से 50 तक उल्टी गिनती लिखवा रहा था। गलती होने पर वह झल्ला गया और बेलन से बच्ची की बेरहमी से पिटाई करने लगा।
मारपीट के दौरान बच्ची बेहोश हो गई। घबराए पिता ने मामले को छिपाने के लिए पत्नी को फोन कर बताया कि बच्ची सीढ़ियों से गिर गई है।
पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस
मां की शिकायत पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। फरीदाबाद सेक्टर-58 थाना पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
क्राइम ब्रांच सेक्टर-56 की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे एक दिन की रिमांड पर लिया है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी को समझा जा सके और परिवार व पड़ोसियों के बयान की पुष्टि की जा सके।
सिर में गंभीर चोट बनी मौत की वजह
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बच्ची के सिर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं, जो उसकी मौत का कारण बनीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर बच्चों के साथ घरेलू हिंसा और पढ़ाई के नाम पर की जाने वाली क्रूरता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।














