गारु (लातेहार): भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशन में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 32वीं वाहिनी, लातेहार द्वारा नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत आयोजित 25 दिवसीय सिलाई एवं ड्राइविंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन मंगलवार को बासकरचा एसएसबी कैंप में किया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षित प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें भी प्रदान की गईं।
कमांडेंट श्री राजेश सिंह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 3 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक संचालित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित एवं सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।

समापन समारोह में पंचायत की मुखिया श्रीमती राजोलिया टोप, पंचायत प्रतिनिधि श्री मार्शल बाग, मीडिया प्रतिनिधि, ग्रामीणजन एवं एसएसबी के अधिकारी व जवान उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
इस कार्यक्रम से महुआडांड़ प्रखंड के बासकरचा, छगरही, दौना, लखेपुर, दुरूप, जाता, तंबोली, अक्सी सहित आसपास के गांवों की महिलाओं एवं 20 जरूरतमंद ग्रामीण युवाओं को लाभ मिला। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा सिलाई एवं ड्राइविंग से संबंधित व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी गई, जिससे प्रतिभागियों को भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
इस अवसर पर सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त 20 महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित की गईं, जबकि 12 अन्य महिलाओं को अप्रैल माह तक मशीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। वहीं ड्राइविंग प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ लर्नर लाइसेंस भी प्रदान किए गए।
समारोह को संबोधित करते हुए कमांडेंट श्री राजेश सिंह ने कहा कि एसएसबी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए लगातार जन कल्याणकारी कार्यक्रम चला रहा है। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य शिविर, कृषि तकनीक प्रशिक्षण एवं सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नागरिक कल्याण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे अपने परिवार और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।














