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UGC के नए नियमों पर क्यों मचा है बवाल? आसान भाषा में समझिए पूरी कहानी

On: January 29, 2026 11:48 AM
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नई दिल्ली: देश में इन दिनों यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर जबरदस्त चर्चा और विवाद छाया हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक, यूनिवर्सिटी कैंपस से लेकर सड़कों और चौराहों तक, हर जगह इस नियम पर बहस हो रही है। कोई इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है, तो कोई इसे समाज को बांटने वाला फैसला करार दे रहा हैं।


दरअसल, यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। यह नियम वर्ष 2012 में लागू पुराने प्रावधानों की जगह लेंगे। यूजीसी का दावा है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, जेंडर या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव को समाप्त करना है।


क्या है नया नियम?


यूजीसी के मुताबिक, नए रेगुलेशन के तहत अब उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को लेकर दायरा और व्यापक कर दिया गया है। अब तक ऐसी शिकायतें मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।


इसका सीधा मतलब यह है कि अब OBC वर्ग के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज करा सकेंगे।

नए नियमों के मुताबिक़ कोई भी भेदभाव-संबंधी सूचना मिलते ही 24 घंटे के भीतर समता समिति की बैठक बुलाई जाएगी। पंद्रह वर्किंग डेज़ में जांच रिपोर्ट संस्थान प्रमुख को भेजी जाएगी और प्रमुख को सात वर्किंग डेज के भीतर ज़रूरी कार्रवाई करनी होगी। अगर मामला दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है, तो पुलिस को तुरंत सूचित किया जाएगा।नए प्रावधानों के तहत अब प्रवेश के समय सभी छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों को भी एक लिखित घोषणा देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि वे किसी भी तरह के भेदभाव में शामिल नहीं होंगे।
हॉस्टल आवंटन, कक्षा विभाजन और मेंटर समूहों का गठन पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भेदभाव-रहित तरीके से किया जाएगा। इसके अलावा कैंपस में समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान, कार्यशालाएँ और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर छात्रों को पेशेवर काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।


नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए यूजीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू करना होगा, ताकि सभी को समान अवसर मिल सकें और समावेशी माहौल को मजबूती मिले।
यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे यूजीसी की विभिन्न योजनाओं से वंचित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, ऐसे संस्थानों पर डिग्री पाठ्यक्रम चलाने, ओपन एवं डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन कार्यक्रम संचालित करने पर भी रोक लगाई जा सकती है। गंभीर मामलों में संस्थान का नाम यूजीसी की सूची से हटाने का प्रावधान भी किया गया है।


हर उच्च शिक्षा संस्थान की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वह छात्रों और कर्मचारियों के प्रति किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही जाति, समुदाय, धर्म, भाषा, जातीय पहचान, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर बिना किसी पक्षपात के सभी के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।


कॉलेज और यूनिवर्सिटी में क्या होगा बदलाव?


नए नियमों के अनुसार, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में अब SC, ST और OBC के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी स्तर पर एक समानता समिति (Equality Committee) का गठन किया जाएगा। इस समिति में OBC, महिला, SC, ST और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। समिति हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजेगी। यूजीसी का कहना है कि इससे शिकायतों की निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।


क्यों हो रहा है विरोध?


नियम लागू होते ही देश के कई हिस्सों में, खासकर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला है। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है और इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाने का रास्ता खुल सकता है। कई प्रभावशाली सामाजिक और धार्मिक नेताओं ने भी इस नियम पर सवाल उठाए हैं। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं, जहां लोग सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर #ShameOnUGC जैसे हैशटैग भी ट्रेंड कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए नियम बिना पर्याप्त चर्चा के लागू किए गए।

उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे रहे, जहां यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पार्टी के 11 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी नए यूजीसी नियमों को काले कानून बताते हुए इस्तीफा दे दिया है। उनका दावा है कि ये नियम उच्च शिक्षा में समानता लाने के नाम पर लागू किए गए हैं, लेकिन ये उच्च जाति के समाज के खिलाफ हैं।

झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान नहीं

नए नियम के तहत झूठी अथवा फर्जी शिकायत करने वालों के लिए न कोई जुर्माना का प्रावधान है और न सजा का। ऐसे में नियमों को गलत तरीके से इस्तेमाल करने की आशंका जताई जा रही रही है।

नए नियमों में एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग शामिल हैं, लेकिन जनरल कैटेगरी के सदस्य को समति में नहीं रखा गया है। यानी कि जनरल कैटेगरी को पीड़ित नहीं माना गया है, सिर्फ आरोपी माना जा सकता है। इससे कमेटी के फैसले एकतरफा होने का डर जताया जा रहा है।


चुनावी राजनीति में एंट्री


यह मुद्दा अब सिर्फ शैक्षणिक सुधार तक सीमित नहीं रहा है। यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। अलग-अलग राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा और तेज होगा।


बड़ा सवाल


यूजीसी का नया रेगुलेशन एक तरफ जहां कैंपस में समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में मजबूत कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर समाज में ध्रुवीकरण की आशंका भी जताई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नियम वाकई उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का मील का पत्थर बनेगा, या फिर यह सामाजिक और राजनीतिक विभाजन को और गहरा करेगा? इसका असर आने वाले दिनों में न सिर्फ कैंपस, बल्कि देश की चुनावी राजनीति में भी साफ नजर आ सकता है।

UGC के नए नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच आज सुनवाई करेगी। नए नियमों को चुनौती देते हुए दाखिल याचिकाओं पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच सुनवाई करेगी।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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