तिनसुकिया: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को असम के तिनसुकिया पहुंचे, जहां उन्होंने ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ असम (AASAA) द्वारा आयोजित आदिवासी महासभा में शिरकत की। महासभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने असम में सदियों से रह रहे झारखंड मूल के आदिवासियों की समस्याओं, अधिकारों और पहचान के मुद्दे को मजबूती से उठाया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने असम की सांस्कृतिक पहचान और प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि लगभग डेढ़ सौ वर्षों से असम में रह रहे आदिवासी समुदाय से आज सीधे संवाद का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वे असम से जुड़ी खबरों और यहां के आदिवासियों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं।
आदिवासी समाज ने सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड एक ऐसा प्रदेश है, जहां आज़ादी से पहले ही आदिवासी समाज शोषण के खिलाफ संघर्ष कर रहा था। बाबा तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हु और फूलो-झानो जैसे वीरों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश आजाद होने के बाद भी आदिवासी समाज आज तक अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करने को मजबूर क्यों है।
झारखंड राज्य का सपना संघर्षों से साकार हुआ
सीएम सोरेन ने कहा कि जब अलग झारखंड राज्य की कल्पना की गई थी, तब कई लोगों ने उसका मजाक उड़ाया था, लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक झारखंड विरोधी ताकतों ने राज्य पर शासन किया, जिससे राज्य का विकास बाधित हुआ। उन्होंने कहा कि 2024 में झारखंड की जनता ने ऐतिहासिक जनादेश देकर उनकी सरकार को दोबारा सत्ता सौंपी।
असम के आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों पर चिंता
मुख्यमंत्री ने असम में आदिवासियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि चाय उद्योग आदिवासियों के खून-पसीने से चलता है, लेकिन इसके बावजूद आदिवासी समाज हाशिए पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां के सत्ताधारी वर्ग आदिवासियों को कमजोर बनाए रखना चाहते हैं और उनके कार्यक्रमों को असफल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जरूरत पड़ी तो झारखंड से पूरा समाज खड़ा होगा
सीएम हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा कि आदिवासी समाज स्वाभिमानी है और यदि उसे मजबूर किया गया, तो झारखंड का आदिवासी समाज असम के आदिवासियों के साथ मजबूती से खड़ा होगा।
उन्होंने कहा, हम धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की संतान हैं। अन्याय के खिलाफ संघर्ष हमारी पहचान है।
सरकार की योजनाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण का जिक्र
मुख्यमंत्री ने झारखंड सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में 56 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल चुनाव के समय योजनाओं की नकल करता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं देता।
एकजुटता का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में सीएम सोरेन ने असम के आदिवासियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि फूट डालो और राज करो की नीति से बाहर निकलकर सभी आदिवासी समुदायों को एक मंच पर आना होगा, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे असम के आदिवासियों के संपर्क में रहेंगे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।












