नई दिल्ली: बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह घटना संसदीय इतिहास में एक असाधारण उदाहरण के रूप में दर्ज हो गई, क्योंकि करीब 22 वर्षों बाद ऐसा हुआ जब प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद थे और भाषण देने के लिए तैयार भी थे, लेकिन अचानक उत्पन्न हालातों के चलते लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। इसके पीछे सुरक्षा से जुड़ी गंभीर आशंकाएं सामने आई हैं।
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों का दावा है कि विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री पर शारीरिक हमला किए जाने की संभावित योजना की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। इसी इनपुट के आधार पर एहतियातन विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। बताया गया कि महिला सांसदों को आगे बैठाकर एक तरह की मानवीय ढाल बनाई गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेरने और हमला करने के इरादे से संसद में आए थे। मनोज तिवारी के मुताबिक, महिला सांसदों को ढाल बनाकर पूरा प्लान तैयार किया गया था। यह केवल विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला था।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में इस तरह की हरकतें न केवल निंदनीय हैं, बल्कि देश की संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ भी हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती जाती, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
वहीं कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं ने इसे सत्ता पक्ष की साजिश और ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कांग्रेस का कहना है कि वे केवल अपनी बात रखना चाहते थे और किसी भी तरह की हिंसा का सवाल ही नहीं उठता।
फिलहाल इस पूरे मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री के बिना धन्यवाद प्रस्ताव का पारित होना, सुरक्षा इनपुट और आरोप-प्रत्यारोप ने बजट सत्र को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।












