गढ़चिरौली: छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र बॉर्डर पर नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। गढ़चिरौली जिले के अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में तीन दिनों तक चले भीषण एनकाउंटर में महाराष्ट्र पुलिस की C-60 कमांडो यूनिट और सीआरपीएफ की QAT टीम ने 25 लाख रुपये के इनामी टॉप नक्सली कमांडर प्रभाकर समेत कुल 7 खूंखार माओवादियों को मार गिराया है। मारे गए नक्सलियों में 3 महिला कैडर भी शामिल हैं।
टॉप नक्सली प्रभाकर ढेर, संगठन को बड़ा झटका
मुठभेड़ में मारा गया सबसे बड़ा नाम प्रभाकर उर्फ लोकेती चंद्र राव का है, जो माओवादियों की कुख्यात ‘कंपनी नंबर-10’ का कमांडर था। तेलंगाना के कामारेड्डी जिले का रहने वाला प्रभाकर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। सरकार ने उसके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसकी मौत को नक्सली नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
तीन दिन चला ऑपरेशन
सुरक्षाबलों ने खुफिया इनपुट के आधार पर अबूझमाड़ के जंगलों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। 6 फरवरी की सुबह दोनों ओर से जबरदस्त गोलीबारी हुई। पहले चरण में C-60 कमांडोज ने 3 नक्सलियों को ढेर किया, इसके बाद हुई दूसरी मुठभेड़ में 4 और माओवादी मारे गए।
एक जवान शहीद, एक घायल
इस अभियान में महाराष्ट्र पुलिस को भी नुकसान उठाना पड़ा। नक्सलियों की फायरिंग में C-60 के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38) गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर भामरागड़ अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
शहीद जवान को गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनका पार्थिव शरीर गृहग्राम भेजा गया है। शनिवार को उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इसी मुठभेड़ में किष्ट्यापल्ली निवासी जवान जोगा मदवी भी गोली लगने से घायल हुए। उन्हें भी एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए लाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक उनकी हालत अब खतरे से बाहर है।
हथियारों का जखीरा बरामद
मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने 7 माओवादियों के शव (4 पुरुष और 3 महिला) बरामद किए हैं। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी मिले हैं, जिनमें 3 AK-47 राइफलें, 1 सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR) शामिल हैं।
बाकी नक्सलियों की पहचान जारी
महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार प्रभाकर के अलावा मारे गए अन्य 6 माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। इलाके में अब भी सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि किसी अन्य नक्सली की मौजूदगी को पूरी तरह खत्म किया जा सके।














