कोडरमा: जिले के जयनगर प्रखंड अंतर्गत खरियोडीह पंचायत के गड़ियाई बिरहोर टोला से 10 बच्चों के रहस्यमय ढंग से लापता होने की घटना सामने आई है। एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने से पूरे इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। परिजन बदहवास हैं, वहीं पुलिस-प्रशासन की शुरुआती उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
श्राद्ध भोज में गए थे
स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव ने बताया कि 1 फरवरी की रात बिरहोर टोला के कई लोग परसाबाद में आयोजित एक श्राद्ध भोज में शामिल होने गए थे। जब सभी लोग वापस लौटे, तब यह बात सामने आई कि टोले के 10 बच्चे उनके साथ नहीं हैं। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर बच्चों की तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो अगले दिन मुखिया को इसकी सूचना दी गई।
शुरुआत में शिकायत गंभीरता से नहीं ली गई
मुखिया राजेंद्र यादव के अनुसार, बच्चों के लापता होने की जानकारी मिलते ही उन्होंने जयनगर थाना प्रभारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को अवगत कराया। हालांकि आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और यह कहकर टाल दिया कि बिरहोर समुदाय घुमक्कड़ प्रवृत्ति का होता है और बच्चे खुद लौट आएंगे।
मुखिया का कहना है कि यदि प्रशासन शुरुआत में ही सक्रिय हो जाता, तो संभवतः बच्चों का जल्द पता चल सकता था।
हरकत में आया प्रशासन
जब 5 फरवरी तक बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला, तब शुक्रवार को परिजन सामूहिक रूप से जयनगर थाना पहुंचे और पुलिस से खोजबीन की गुहार लगाई। मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचने के बाद कोडरमा एसपी अनुदीप सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया।
पुलिस और टेक्निकल सेल सक्रिय
एसपी के निर्देश पर पुलिस और टेक्निकल सेल की टीम गड़ियाई बिरहोर टोला पहुंची और बच्चों के परिजनों से विस्तृत पूछताछ की। मामले की जांच कर रहे प्रशिक्षु डीएसपी ने बताया कि सभी संभावित पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही बच्चों को खोज लिया जाएगा।
गलत ट्रेन पकड़ने की आशंका, CCTV फुटेज खंगाले जा रहे
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, बिरहोर टोला के लोग अक्सर परसाबाद से ट्रेन पकड़कर यदुडीह हॉल्ट तक आते-जाते हैं। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों ने गलती से उल्टे रूट की ट्रेन पकड़ ली होगी, जिससे वे धनबाद की ओर चले गए हों।
इस कड़ी में परसाबाद के दोनों ओर स्थित रेलवे स्टेशनों के CCTV फुटेज मंगवाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके।
घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बच्चों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इससे परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करता है और यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।














