नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। लोकसभा में रोज़ाना हो रहे हंगामे और कार्यवाही में बार-बार व्यवधान के बीच अब सियासी संकट और गहरा सकता है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं।
सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों की एक अहम बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि यदि लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, तो स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष के पक्ष में काम कर रहे हैं और विपक्ष के नेता को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा स्पीकर बार-बार विपक्षी सदस्यों को अपनी बात रखने से रोकते हैं, जबकि सरकार के नेताओं को खुलकर बोलने का समय दिया जाता है। इसके अलावा, हाल ही में स्पीकर द्वारा संसद परिसर में प्रधानमंत्री पर विपक्षी सांसदों द्वारा हमले की आशंका जताने को लेकर भी विपक्ष खासा नाराज़ है। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के बयान से न केवल विपक्ष की छवि को नुकसान पहुंचाया गया है, बल्कि सांसदों के विशेषाधिकारों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए संविधान के तहत प्रस्ताव लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत लाया जाता है, जो लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। इस प्रावधान के अनुसार, स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा के कम से कम 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। इसके अलावा, प्रस्ताव पेश करने से पहले सदन को 14 दिन का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। बताया जा रहा है कि विपक्ष जल्द ही यह नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंप सकता है। हालांकि विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया है कि फिलहाल इस प्रस्ताव पर सभी सांसदों के हस्ताक्षर पूरे नहीं हुए हैं। नोटिस मिलने के बाद स्पीकर खुद उस कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करता। उस दिन सदन की कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या किसी वरिष्ठ सदस्य द्वारा चलाई जाती है। जितने सांसद तब लोकसभा में उपस्थित हों और मतदान कर रहे हों, उसमें उनमें से 50 फीसदी + 1 सांसद का समर्थन होना चाहिए। तो स्पीकर तुरंत पद से हट जाता है।
अगर विपक्ष यह अविश्वास प्रस्ताव लाने में सफल रहता है, तो यह लगातार दूसरे कार्यकाल में लोकसभा अध्यक्ष पद संभाल रहे ओम बिरला के कार्यकाल पर एक बड़ा सवालिया निशान होगा। इससे पहले किसी स्पीकर के को हटाने का प्रस्ताव कभी पास नहीं हुआ, नोटिस तो दी गई, बहस भी हुई है, लेकिन वोटिंग तक मामला नहीं पहुंचा।
इस बीच विवाद और गहरा गया है क्योंकि छह महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के भी हस्ताक्षर हैं। महिला सांसदों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर सरकार के दबाव में आकर सदन का संचालन कर रहे हैं और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है।










