नई दिल्ली: लोकसभा में बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। 11 फरवरी को सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण ‘भारत माता को बेचा जा रहा है।’ उनके इस बयान के बाद संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक जोरदार बहस छिड़ गई है।
निशिकांत दुबे ने पेश किया प्रस्ताव
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के बयान को गंभीर बताते हुए उनके खिलाफ लोकसभा में एक सब्सटेंटिव मोशन (औपचारिक प्रस्ताव) पेश किया है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सदन में भ्रामक और आधारहीन आरोप लगाकर देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और उन ताकतों को बल देते हैं जो भारत के हितों के खिलाफ काम करना चाहती हैं। निशिकांत दुबे ने अपने प्रस्ताव में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है। इसके साथ ही उन्होंने आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट प्रावधानों का बचाव करते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। इसी दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर एक ट्रेड डील का जिक्र करते हुए सरकार पर अमेरिका के सामने झुकने और देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश को अमेरिका के हाथों बेच दिया।
राहुल गांधी के इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘आज तक कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो भारत को खरीद सके।’ रिजिजू ने विपक्ष से जिम्मेदार बयानबाजी की अपेक्षा की और कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
क्या होता है सब्सटेंटिव मोशन?
संसदीय परंपराओं के तहत सब्सटेंटिव मोशन एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसके माध्यम से किसी मुद्दे पर चर्चा या कार्रवाई की मांग की जाती है। यह प्रस्ताव किसी सदस्य के बयान की निंदा, किसी निर्णय की समीक्षा या विशेष कार्रवाई की अनुशंसा से जुड़ा हो सकता है। ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष (या राज्यसभा में सभापति) के पास होता है।
यदि अध्यक्ष प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो उस पर सदन में चर्चा और आगे की प्रक्रिया तय की जाती है। हालांकि, ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संसदीय नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
वहीं कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जो विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार आलोचना से घबराकर ऐसे प्रस्तावों के जरिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।












