भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक ऐसा पारिवारिक मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। पांच साल से चल रहे वैवाहिक विवाद का अंत एक अनोखे समझौते के साथ हुआ, जिसमें पति की प्रेमिका ने पत्नी और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए डुप्लेक्स मकान और नकद राशि देने पर सहमति जताई।
सहकर्मी से प्रेम, परिवार में बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार 42 वर्षीय केंद्रीय सरकारी अधिकारी को अपने ही विभाग में कार्यरत 54 वर्षीय महिला से प्रेम हो गया। दोनों के बीच बढ़ती नजदीकियों का असर उसके वैवाहिक जीवन पर पड़ा और पति-पत्नी के बीच रोजाना विवाद होने लगे। इसका सीधा असर उनकी 16 और 12 वर्ष की बेटियों पर भी पड़ रहा था।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बड़ी बेटी ने ही फैमिली कोर्ट में गुहार लगाई, जिसके बाद न्यायालय ने दंपति को काउंसलिंग के लिए बुलाया। कई दौर की काउंसलिंग में पति ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी सहकर्मी के साथ रहना चाहता है और आपसी सहमति से तलाक लेना चाहता है, हालांकि उसने बेटियों के प्रति अपने लगाव की बात भी दोहराई।
पत्नी ने रखी आर्थिक सुरक्षा की शर्त
करीब पांच साल तक चले विवाद के बाद समझौते की राह निकली। पत्नी ने अपनी और बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शर्त रखी कि उसे एक डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। संपत्ति की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचक के यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। मकान और नकद मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की व्यवस्था करने पर वह राजी हो गई। उसका कहना था कि वह नहीं चाहती कि उसके प्रेमी का परिवार आर्थिक रूप से असुरक्षित रहे।
आपसी सहमति से खत्म हुआ विवाद
दोनों पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट में समझौता दर्ज किया गया और तलाक की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस समझौते के तहत पत्नी और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जबकि पति अपनी सहकर्मी के साथ रहने के लिए स्वतंत्र होगा।
यह मामला कई लोगों को 1997 में आई फिल्म ‘जुदाई’ की कहानी की याद दिला रहा है, जिसमें पैसों के बदले रिश्तों का सौदा दिखाया गया था।
यह अनोखा समझौता फिलहाल शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां प्रेम, विवाह और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन का एक अलग ही उदाहरण देखने को मिला।














