दिल्ली:लैंड फॉर जॉब मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इधर लालू ने नकारे CBI के आरोप, बोले- करेंगे मुकदमे का सामना।
रेल मंत्री रहते नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोप से लालू यादव ने इनकार किया है. लालू यादव ने कोर्ट में सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के आरोप से इनकार किया और कहा कि हम मुकदमे का सामना करेंगे.
अदालत की इस कार्रवाई के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमा) शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी टिप्पणी की और इसे एक ‘संगठित साजिश’ करार दिया। लालू यादव और राबड़ी देवी कोर्ट पहुंच चुके हैं। गौरतलब है कि लालू यादव और उनका परिवार रविवार शाम ही पटना से दिल्ली पहुंच गया था ताकि अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सके।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को फिजिकली पेश होने से छूट दी है, जब तक कि फिजिकली पेश होने का कोई ऑर्डर न हो। मीसा भारती ने कहा कि कोर्ट ने उनकी उम्र और सेहत को देखते हुए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश होने को कहा है।
अदालत की सख्त टिप्पणी, ‘निजी जागीर की तरह हुआ इस्तेमाल’
सुनवाई के दौरान विशेष जज विशाल गोगने ने मौखिक रूप से बेहद कड़ी टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि रेल मंत्रालय को एक ‘निजी जागीर’ की तरह इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आया है कि सरकारी नौकरियों को महज एक ‘सौदेबाजी के हथियार’ के रूप में इस्तेमाल कर कीमती संपत्तियां हासिल की गईं। जज ने इसे एक ‘आपराधिक सिंडिकेट’ की कार्यप्रणाली बताते हुए कहा कि रेलवे अधिकारियों और करीबियों की मिलीभगत से यह पूरी साजिश रची गई थी।
इन दिग्गजों पर चलेगा मुकदमा
अदालत ने जिन प्रमुख चेहरों पर आरोप तय किए हैं, उनमें शामिल हैं:
लालू प्रसाद यादव (पूर्व रेल मंत्री)
राबड़ी देवी (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार)
तेजस्वी यादव (पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार)
मीसा भारती और हेमा यादव (लालू यादव की बेटियां)
कुल 41 आरोपियों के खिलाफ अब सबूतों के आधार पर गवाही और जिरह शुरू होगी। हालांकि, अदालत ने 52 अन्य लोगों को इस मामले में राहत देते हुए बरी कर दिया है।
क्या है पूरा घोटाला?
CBI के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि:
रेलवे के ग्रुप डी पदों पर भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया।
नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने सीधे या अपने रिश्तेदारों के जरिए लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम सस्ते दामों पर जमीन ट्रांसफर की।
कई मामलों में तो नियुक्ति पत्र मिलने से पहले ही जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई थी।
जमीन के बदले नौकरी देने का यह खेल मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जैसे रेलवे जोन में बड़े पैमाने पर खेला गया।
गवाहों और सबूतों का सामना
आरोप तय (Charge Framing) होने का मतलब है कि अदालत ने माना है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब ट्रायल के दौरान CBI अपने गवाहों को पेश करेगी और बचाव पक्ष उनसे जिरह करेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है और आरोपियों के पास ट्रायल के दौरान खुद को निर्दोष साबित करने का पूरा मौका रहेगा।










