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सीएम हेमंत अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे, पाहन चुनाव में हिस्सा लिया, जन समस्याएं सुनी समाधान का भरोसा दिया

On: February 16, 2026 9:14 PM
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रामगढ़ : सीएम हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। वहां उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिया।

साथ ही गांव में संथाली समाज के लोगों के साथ बैठक कर पाहन के चुनाव में भी हिस्सा लिया।मुख्यमंत्री रामगढ़ जिला स्थित अपने पैतृक गांव नेमरा में आयोजित एक पारंपरिक सामाजिक सद्भाव बैठक में सम्मिलित हुए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री का ग्रामीणों ने हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। रामगढ़ जिला प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

इस दौरान संथाल समाज की पारंपरिक ‘कुठ कटी’ रीति से पाहन का चयन की प्रक्रिया हुई और इस मौके पर खुद सीएम हेमंत सोरेन मौजूद रहे।

दोपहर में सीएम का हेलीकॉप्टर नेमरा के स्थायी हेलीपैड पर उतरा, जहां पुलिस प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। हेलीपैड से वे सीधे अपने पैतृक घर पहुंचे, परिवार के लोगों से मुलाकात की और फिर करीब दो बजे आमसभा स्थल पर पहुंच गए। खास बात यह रही कि वे चयन प्रक्रिया में शुरुआत से लेकर आखिर तक मौजूद रहे।

सर्वसम्मति से चेतन टुडू बने नाइके बाबा
सोहन सोरेन के त्यागपत्र के बाद यह आमसभा बुलाई गई थी। गांव और समाज के लोगों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से चेतन टुडू को नया नाइके बाबा चुना गया।

उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाई गई, हथियार देकर सम्मानित किया गया और विधिवत जिम्मेदारी सौंपी गई। नाइके के तौर पर अब वे ग्राम देवताओं की पूजा, फसल और बारिश से जुड़े अनुष्ठान, और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों की अगुवाई करेंगे। पहले से समाज में सक्रिय पदाधिकारियों में मांझी बाबा हेतंत सोरेन, प्राणिक बाबा बिरजू सोरेन, भादो राम बाबा सुखदेव किस्कू, कुड़म नाइके छुट्टू बेसरा और जोग मांझी विश्वनाथ बेसरा शामिल रहे।

सीएम के कार्यक्रम को देखते हुए गांव और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हेलीपैड से लेकर सभा स्थल तक सुरक्षा घेरा बना रहा। डीडीसी आशीष अग्रवाल, डीएसपी मुख्यालय चंदन वत्स, इंस्पेक्टर पंकज कुमार, बीडीओ सुधा वर्मा, सीओ सीताराम महतो, बरलंगा थाना प्रभारी अशोक कुमार समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे और पूरी व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे।

ग्रामीणों ने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखीं। सबसे ज्यादा मांग धान अधिप्राप्ति केंद्र खोलने को लेकर उठी। किसानों का कहना था कि अगर स्थानीय स्तर पर केंद्र खुलेगा तो उन्हें अपनी उपज का सही दाम मिल सकेगा। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव और डॉक्टरों की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी सामने आए। ओराडीह क्षेत्र की महिलाओं ने पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं की समस्या बताई। महिला समिति की ओर से विकास कार्यों से जुड़े आवेदन भी सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सभी आवेदनों को संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
नेमरा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने चाचा श्रीकांत सोरेन से भी मुलाकात की, जो पिछले पांच वर्षों से लकवा से पीड़ित हैं। उनकी सेहत की जानकारी लेने के बाद सिविल सर्जन नवल कुमार को साफ निर्देश दिया गया कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही न हो, जरूरी दवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और नियमित मॉनिटरिंग हो।

परंपरा और प्रशासन साथ-साथ
संथाल समाज में नाइके का पद सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। गांव के बड़े फैसलों और अनुष्ठानों में उनकी भूमिका केंद्रीय होती है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए गए। इससे ग्रामीणों में खास उत्साह देखने को मिला। लोगों का कहना था कि यह सिर्फ एक चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी पहचान और परंपरा का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए बीएसएनएल टॉवर का सिग्नल बाधित हो गया, जिससे इंटरनेट सेवा प्रभावित रही। हालांकि इससे आयोजन पर कोई खास असर नहीं पड़ा और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। मौके पर मुखिया जीतलाल टुडू, पूर्व मुखिया अनुज कुमार, कपिल महतो, हरण सिंह मुंडा, आलम अंसारी, बरतू करमाली, सुनील करमाली, फखरुद्दीन अंसारी, सतीश मुर्मू (मुखिया, सूतरी पंचायत), गोला थाना प्रभारी अभिषेक कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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