अयोध्या: चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव का केंद्र बन गया। राम नगरी में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामलला के दर्शन किए। उसके बाद वैदिक विधि-विधान के साथ 150 किलोग्राम सोने से जड़ित ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना की।
यह यंत्र वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के दूसरे फ्लोर पर बने राम दरबार में स्थापित किया गया है, जिसे साधारण धार्मिक संरचना नहीं बल्कि वैदिक विज्ञान और प्राचीन ज्यामितीय सिद्धांतों का अद्भुत संगम माना जा रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, इस ‘श्रीराम यंत्र’ को करीब दो वर्ष पूर्व एक भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया था।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ‘श्रीराम यंत्र’ दिव्य ऊर्जा का स्रोत है, जो मंदिर परिसर में सकारात्मकता और आध्यात्मिक स्पंदन को बढ़ाता है। इसकी स्थापना से मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति और भी सशक्त मानी जा रही है।
इस भव्य अनुष्ठान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मां अमृतानंदमयी भी मौजूद रहे। साथ ही देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
अनुष्ठान को पूर्ण कराने के लिए दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या से आए 51 प्रतिष्ठित वैदिक विद्वानों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति का वातावरण बना रहा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले 400 से अधिक श्रमिकों को सम्मानित किया। उन्होंने मंदिर के बाहरी परकोटा में स्थित एक मंदिर पर ध्वजारोहण भी किया और श्रमिकों के योगदान की सराहना की।
आपको बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या से मथुरा के लिए रवाना हो गईं। वहां वह राष्ट्रपति इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी। 20 मार्च को वह प्रेमानंद महाराज से भी मुलाकात करेंगी।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति मुर्मू का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले वे 1 मई 2024 को यहां आई थीं, जब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था।














