नई दिल्ली: आम लोगों के लिए जरूरी दवाओं की कीमतों में 1 अप्रैल से हल्की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में वार्षिक बदलाव के आधार पर राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में 0.6 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दे दी है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के अनुसार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में WPI में 2024 की तुलना में लगभग 0.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के अनुरूप दवाओं की कीमतों में संशोधन किया गया है।
यह नई दरें NLEM में शामिल 1000 से अधिक दवाओं पर लागू होंगी। उल्लेखनीय है कि निर्धारित (शेड्यूल्ड) दवाओं की कीमतों में संशोधन वर्ष में केवल एक बार ही किया जाता है।
इस सूची में आमतौर पर उपयोग होने वाली दवाएं जैसे पैरासिटामोल, विभिन्न एंटीबायोटिक्स (जैसे एज़िथ्रोमाइसिन), एंटी-एनीमिया दवाएं, विटामिन एवं खनिज सप्लीमेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा कोविड-19 के मध्यम और गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉयड भी इस सूची का हिस्सा हैं।
हालांकि, यह बढ़ोतरी मामूली मानी जा रही है, लेकिन फार्मा उद्योग के अनुसार उत्पादन लागत में भारी वृद्धि के मुकाबले यह राहत पर्याप्त नहीं है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, खासकर ईरान युद्ध के चलते कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ सप्ताहों में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) की कीमतों में औसतन 30 से 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। वहीं, ग्लिसरीन 64 प्रतिशत, पैरासिटामोल 25 प्रतिशत और सिप्रोफ्लॉक्सासिन करीब 30 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं।
इसके अलावा दवाओं की पैकेजिंग में उपयोग होने वाली सामग्री जैसे पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और एल्युमिनियम फॉयल के दाम भी लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। ग्लिसरीन और प्रोपाइलीन ग्लाइकोल जैसे सॉल्वेंट्स, जो सिरप, ओरल ड्रॉप्स और अन्य तरल दवाओं में इस्तेमाल होते हैं, उनकी कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए उद्योग जगत का मानना है कि लागत में बढ़ोतरी का असर आगे भी दवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार द्वारा की गई यह सीमित बढ़ोतरी उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ नहीं डालेगी, लेकिन आने वाले समय में दवा बाजार में और बदलाव संभव हैं।













