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रूस का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल से किसी भी देश को नहीं बेचेगा पेट्रोल; भारत पर कितना असर?

On: March 28, 2026 11:16 PM
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता तेज हो गई है। इसी बीच रूस सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की है। इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रण में रखना बताया गया है।

रूस के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ा दी है, वहीं भारत के लिए भी यह चिंता का विषय बन सकता है। दरअसल, पश्चिम एशिया में संकट के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारत रूस से आयात बढ़ाकर आपूर्ति संतुलित कर रहा था, लेकिन निर्यात पर रोक से आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

हालांकि भारत सरकार ने मौजूदा स्थिति को लेकर राहत भरी जानकारी दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार देश में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अगले दो महीनों तक आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित बताई गई है। इसके साथ ही देश की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत या उससे अधिक क्षमता पर संचालित हो रही हैं, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना हुआ है।

सरकार ने यह भी बताया कि घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे रसोई गैस की उपलब्धता बेहतर हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है।

रूस में यह निर्णय उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया। बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और देश के भीतर ईंधन आपूर्ति की समीक्षा की गई। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने पहले ही निर्देश दिए थे कि घरेलू ईंधन कीमतें निर्धारित सीमा से अधिक न बढ़ें। इसी के मद्देनजर निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया गया।

रूस के ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि देश में रिफाइनिंग क्षमता मजबूत है और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। तेल कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं। निर्यात पर रोक के जरिए रूस अपने घरेलू बाजार को प्राथमिकता देते हुए कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस के इस कदम से वैश्विक आपूर्ति और सीमित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

रूस द्वारा पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन भारत के लिए इससे किसी बड़े संकट की आशंका फिलहाल नजर नहीं आती। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों की संरचना रूस के इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होती। भारत रूस से मुख्य रूप से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करता है, न कि तैयार पेट्रोल या अन्य रिफाइंड उत्पाद। देश के पास अत्याधुनिक और विशाल रिफाइनिंग क्षमता है, जिसके चलते भारत कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद खुद तैयार करता है। यही कारण है कि भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।

भारत की कुल रूसी आयात टोकरी में पेट्रोलियम उत्पादों (जैसे तैयार पेट्रोल) की हिस्सेदारी काफी सीमित, लगभग 5 से 7 प्रतिशत ही है। ऐसे में रूस द्वारा पेट्रोल निर्यात रोकने का सीधा असर भारत पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा।

रूस रोजाना करीब 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात करता है। रूस के इस फैसले से उन देशों को बड़ा झटका लगेगा जो रूसी ‘तैयार ईंधन’ के सबसे बड़े खरीदार हैं। मुख्य रूप से चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीकी देश और सिंगापुर जैसे देशों को अब अपनी जरूरतों के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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