सीजीपीसी प्रधान भगवान सिंह को प्रत्याशी गुरु दयाल सिंह मन्नावाल ने सौंपा ज्ञापन
खोला गुरचरण सिंह बिल्ला का पूरा कथित काला चिट्ठा!
गुरचरण सिंह बिल्ला को संयोजक से हटाने की मांग
जमशेदपुर: टिनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में मौजूदा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव गंभीर मोड़ पर आ गया है। मौजूदा कमेटी के वजीर (महासचिव) कश्मीर सिंह शीरे के पाला बदलकर विपक्षी खेमे में एंट्री से चुनाव और रोचक हो गया है और प्रधान की पद के विपक्षी उम्मीदवार गुरदयाल सिंह मन्नावाल टीम का मनोबल सातवें आसमान पर है। उन्हें अब अपनी जीत पक्की नजर आ रही है। इसी बीच चुनाव के लिए गुरु चरण सिंह बिल्ला को संयोजक नियुक्त किए जाने पर विपक्ष को एक और मौका मिल गया है। जिसमें कथित रूप से गुरचरण सिंह बिल्ला के खिलाफ पूर्व में कई गंभीर आरोप लगे हैं। जिसमें गुरु घर की देनदारी होना भी शामिल बताया जा रहा है। जिसके बाद विपक्ष के प्रत्याशी गुरदयाल सिंह मन्नावाल ने केंद्रीय गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के के प्रधान भगवान सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है। जिसमें गुरचरण सिंह बिल्ला के कथित काले चिट्ठे खोले हैं और गंभीर आरोपों की झड़ी लगाते हुए चुनाव टिनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव का संयोजक बदलने की मांग तक कर डाली है
ज्ञापन के माध्यम से गुरदयाल सिंह मन्नावाल ने कहा है कि आपके समक्ष टीनप्लेट गुरुद्वारा चुनाव क लिए बनाए गए संयोजक ओर चुनाव कमिटी मे आपत्ति जाहीर करने हेतु कुछ तथ्य रख रहा हूं
गुरु घर का देनदार हैं गुरचरण सिंह बिल्ला
(1) गुरुचरण सिंह बिल्ला 2011 से 2014 तक टीनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान थे तीन साल के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हुआ 2014 के बाद चुनाव होने वाला था गुरुचरण सिंह ने वोटर लिस्ट नहीं बनाई जिसका चलते काफी विवाद हुआ अंततः 2014 से 2017 तक का कार्यकाल सीजीपीसी ने अपने अधीन ले लिया उस समय सीजीपीसी के प्रधान सरदार इंद्रजीत सिंह थे उन्होंने टीनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी की जिम्मेवारी सरदार सेवा सिंह को सौंपी। सेवा सिंह को गुरुचरण सिंह गुरुद्वारा का न चार्ज दिया न कोई हिसाब किताब सारे दस्तावेज अपने घर ले गए
(2) 2017 से 2023 तक तरसेम सिंह प्रधान थे तरसेम सिंह को भी गुरुचरण सिंह ने कोई चार्ज नहीं दिया जबकी तरसेम सिंह ने गुरुचरण सिंह बिल्ला को पत्रचार के माध्यम से चार्ज लेने के लिए कई बार पोस्टल के माध्यम से के जवाब मांगा लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया।
(3) 2023 से 2026 में सुरजीत सिंह प्रधान बने अपनी कमिटी बनाई गुरुचरण सिंह बिल्ला बिना हिसाब लिए उनको स्कूल सेक्रेटरी बनाया गुरुचरण सिंह ने उन्हें भी चार्ज नहीं दिया ।
सुरजीत सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद जब सुरजीत सिंह ने चुनाव का नोटिस लगाया तब गुरुचरण सिंह ने चुनाव में नामिनेशन भरने क लिए 30.03.2026 को अपने कार्यकाल के जो पैसे बाकी थे कुछ पैसे सुरजीत सिंह को 37100 जमा किये जो बुक सांख्य 157 और रशीद नंबर 15642 में अंकित है जबकि अभी भी गुरु घर का देनदार है
(4) गुरुचरण सिंह चुनाव क लिए नामांकन भरा फिर 2 दिन बाद सुरजीत सिंह का समर्थन में पर्चा वापस ले लिया और सुरजीत सिंह ने चुनाव के लिए कमिटी बनाई जिनमें गुरु घर के देनदार गुरुचरण सिंह बिल्ला को संयोजक बना दिया।
2011 से 2014 के बीच गुरचरण सिंह बिल्ला की प्रधानगी के समय के गुरु घर के गद्दे गायब
(5) 2011 से 2014 की अवधि में जब गुरचरण सिंह प्रधान थे तब गुरु घर के गद्दे कहां गए ना संगत को पता ना कमिटी को कोई खबर
(6) और सोनारी गुरुद्वारा के चुनाव में गुरुचरण सिंह बिल्ला संयोजक बनाए गए थे वह भी इनकी वजह से विवाद हुआ था गुरुचरण सिंह ने सोनारी गुरुद्वारा ऑफिस के टेबल का कांच तोड़ दिया था जिसके चुनाव बाधित हुआ था।
(7) बहुत ही आश्चर्य की बात है जमशेदपुर की सबसे बड़ी सिरमौर संस्था सीजीपीएससी में गुरु घर के देनदार गुरुचरण सिंह बिल्ला को सीजीपीएससी का महासचिव बनाया.
आचार संहिता लगने के बाद गुरु घर का गोलक खोलना बिल्कुल गलत
(8) टीनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के इतिहास में पहली बार किसी प्रधान ने अपने भाई कुलदीप सिंह को खालसा क्लब का तंदूर और फूलों का ठेकेदार बनाया और सुरेंद्र सिंह शिंदे को भी फूलों का ठेका दिया सुरजीत सिंह और इन दो ठेकेदारों को अपने चुनाव कमेटी में भी रखा चुनाव कमेटी में कुलदीप सिंह करमजीत सिंह सुरेंद्र सिंह शिंदे वरूप में परिपूर्ण नहीं है और नशा का सेवन भी करते हैं
25 मार्च से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है और आचार संहिता भी लग चुकी है, आचार संहिता लगने के बाद गुरु घर का कोई लेन-देन चाहे वह गुरु घर का विकास का काम होना चाहिए चाहे गुरु घर की गोलक खोलने का काम हो या कोई विकास का काम हो मौजूदा कमेटी नहीं कर सकती है कमेटी ने जनवरी 2026 हिसाब का नोटिस बोर्ड मे बैलेंस शीट लगाई जिसमें कैश इन हैंड 30,941 रुपए और बैंक बैलेंस 5,53,638 रुपए बताया ऐसी क्या मजबूरी पड़ गई जो गुरु घर की गोलक खोलनी पड़ गई जो आचार संहिता के हिसाब से बिल्कुल गलत है।
ऐसे में सिख संस्थाओ की अभिभावक संस्था सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान होने क नाते आपका पंथिक सामाजिक और कानूनी अधिकार और जवाबदेही बनता है एक निष्पक्ष चुनाव संयोजक क साथ चुनाव कमिटी बनाएं।








