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खूंटाडीह की ऐतिहासिक जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश

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जमशेदपुर:खुंटाडीह स्थित बहुमूल्य जमीन को लेकर दशकों पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। टाटा स्टील लिमिटेड की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने विवादित भूमि पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के अंतिम निपटारे तक इस जमीन पर किसी भी तरह का नया कानूनी अधिकार नहीं बनाया जाएगा।
टाटा स्टील की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि वर्ष 1912 में टाटा टाउनशिप के विकास के लिए इस भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था। कंपनी का दावा है कि 1944 में मुआवजा देकर काश्तकारी अधिकार समाप्त कर दिए गए थे और उसके बाद जमीन पर दोबारा कब्जा ले लिया गया। कंपनी का यह भी कहना है कि इस विवाद से जुड़े मामलों पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट फैसला दे चुका है, इसलिए राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन के नाम पर पुराने मुद्दों को फिर से उठाना उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि विवादित भूमि का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में सेना के कब्जे में है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस भूमि का उपयोग सैन्य जरूरतों के लिए किया गया था और फिलहाल यह रक्षा मंत्रालय की लीज व्यवस्था के अंतर्गत है। इससे मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसमें अब रक्षा हित भी जुड़े हुए हैं।
दरअसल, टाटा स्टील ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें राजस्व अभिलेखों में संशोधन के लिए धारा 90 के तहत कार्यवाही की अनुमति दी गई थी। कंपनी का कहना है कि इससे पहले से तय हो चुके कानूनी विवाद को दोबारा खोला जा रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विवादित जमीन पर खरीद-बिक्री, हस्तांतरण या किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर रोक रहेगी, जब तक मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

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Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।