July 26, 2026

जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मुफ्त सर्जरी कराएगी झारखंड सरकार, कहां और कब होंगे ऑपरेशन?, झारखंड हिंदी समाचार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि राज्य सरकार जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों की पहचान करने और उन्हें समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए विशेष अभियान चला रही है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि राज्य सरकार जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों की पहचान करने और उन्हें समय पर बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए विशेष अभियान चला रही है. इसके तहत 18 साल तक के बच्चों की जांच की जाएगी और जरूरतमंद बच्चों की कोच्चि के एक विशेषज्ञ अस्पताल में मुफ्त सर्जरी की जाएगी।

अब तक 120 बच्चों की जांच की जा चुकी है

शनिवार को शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने बताया कि शिविर में कोच्चि से आये विशेषज्ञ कार्डियक सर्जन द्वारा बच्चों की जांच की जा रही है. अब तक करीब 120 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और जांच का काम जारी है. चिकित्सीय जांच के आधार पर जिन बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होगी, उन्हें इलाज के लिए चुना जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर एक वर्ष में लगभग 1000 बच्चों की स्क्रीनिंग एवं सर्जरी करने का लक्ष्य रखा गया है.

259 बच्चों की जांच की गई, 41 की सर्जरी होगी।

जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को बेहतर एवं समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम, झारखंड सरकार, अमृता हॉस्पिटल एवं रोटरी के संयुक्त तत्वावधान में गिफ्ट ऑफ लाइफ कार्यक्रम के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। 259 बच्चों की जांच की गई, जिनमें से 41 बच्चों को सर्जरी के लिए चिन्हित किया गया। अमृता अस्पताल के नोडल अधिकारी रो. एसपी बगड़िया ने कहा कि गिफ्ट ऑफ लाइफ कार्यक्रम के तहत चयनित बच्चों का इलाज विशेषज्ञ अस्पतालों में किया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी.

समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है

मिशन निदेशक ने कहा कि सभी बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के बाद ही यह तय होता है कि किस बच्चे को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत है, किसे कुछ समय बाद इलाज की जरूरत होगी और किन बच्चों का इलाज दवा से किया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अगर किसी बच्चे में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण दिखें तो उन्हें बिना देर किए डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की टीमों के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

बर्थ वेटिंग रूम की व्यवस्था करें

इससे पहले मिशन निदेशक ने बोकारो परिसदन में सिविल सर्जन समेत जिले के विभिन्न चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. उन्होंने सदर अस्पताल में प्रसव प्रतीक्षा कक्ष की व्यवस्था करने, प्रसव के बाद 48 घंटे तक जच्चा-बच्चा को चिकित्सीय निगरानी में रखने तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का निर्देश दिया. साथ ही मरीजों के परिजनों के लिए अटेंडेंट बेड की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा. उन्होंने जिले के ट्रॉमा सेंटर को अनुमंडलीय अस्पताल में स्थानांतरित करने, बर्न यूनिट एवं पंचकर्म यूनिट को चालू करने तथा योग आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने का निर्देश दिया.

Source link

ख़बर को शेयर करें।

You may have missed