हेपेटाइटिस दिवस पर कार्यक्रम (रांची) (ईटीवी भारत)
रांची: इन दिनों झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों में हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन की समस्या आम हो गयी है. यह वायरस, अत्यधिक शराब के सेवन, कुछ दवाओं, विषाक्त पदार्थों या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण हो सकता है।
इसके मुख्य लक्षण हैं पीलिया, थकान, भूख न लगना, मतली, पेट दर्द और गहरे रंग का पेशाब। समय पर जांच और इलाज से गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। ये बातें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से आयोजित हेपेटाइटिस दिवस पर सामने आईं।
इस अवसर पर हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन विषय पर आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किये. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड द्वारा रांची के एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत वायरल हेपेटाइटिस कार्यक्रम के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार के स्वागत भाषण और मंच पर अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
इस मौके पर रांची सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2017 से जून 2026 तक राज्य में कुल 2,94,411 परीक्षण किए गए, जिसमें हेपेटाइटिस बी (एचबीवी) की सकारात्मकता दर 3.36% से घटकर 1.58% हो गई है, जबकि हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) की दर 0.14% से बढ़कर 0.64% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
जांच और इलाज की प्रक्रिया में नहीं होनी चाहिए देरी-अभियान निदेशक
एनएचएम अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने रोकथाम एवं जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बचाव ही इलाज है, इसलिए हमें रोकथाम की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने समाज में हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये कि जमीनी स्तर पर मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल इलाज से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाये.
इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रीय अस्पतालों और परीक्षण प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया ताकि परीक्षण और उपचार की प्रक्रिया में कोई देरी न हो। उन्होंने विशेषज्ञों की कमी और बीमारी की जटिलता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता जताई और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छोटे जिलों से हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए सभी आवश्यक परीक्षण अभियान शुरू करने का सुझाव दिया.
राज्य महामारी विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार कर्ण ने राज्य में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति और 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में हेपेटाइटिस सी से पूरी तरह से ठीक हो चुके मरीजों को प्रमाण पत्र सौंपे गए और समाज में जागरूकता फैलाने वाले साथियों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया गया।
तकनीकी सत्र में रिम्स रांची के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार ने वायरल हेपेटाइटिस बी और सी के लैब परीक्षण और वायरल लोड परीक्षण की चुनौतियों पर व्याख्यान दिया। इसके बाद रिम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ अजीत डुंगडुंग, डॉ सिद्धार्थ कपूर (सहायक प्रोफेसर) और डॉ रश्मि सिन्हा ने हेपेटाइटिस बी और सी के इलाज पर विस्तृत जानकारी साझा की.
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