सीपीआई (एम) के आखिरी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया है. उसे धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया है. उस पर कुल 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम था.
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को मंगलवार को दो बड़ी कामयाबी मिली. दिन में जहां सारंडा में सक्रिय 24 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, वहीं देर रात सीपीआई माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया. बेसरा के साथ उसके दो सहयोगी मखत उर्फ मोछू और गौरव भी पकड़े गये हैं. यह गिरफ्तारी धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके से हुई. मिसिर और अन्य माओवादियों को धनबाद-गिरिडीह सीमा पर टाटा मैजिक वाहन से पकड़ा गया था. इसके अलावा दो अन्य को भी हिरासत में लिया गया है.
दरअसल, सुरक्षा बलों को मिसिर बेसरा के अपने दो साथियों के साथ गिरिडीह जाने की सूचना मिली थी. जिसके बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने तीनों को पकड़ने के लिए गुप्त योजना बनाई. देर रात योजना सफल हो गयी. पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर करीब 40 साल से माओवादी संगठन में सक्रिय था. धनबाद में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान, वह महाजनी आंदोलन के माध्यम से नक्सली संगठन में शामिल हो गए थे।
मिसिर पोलित ब्यूरो के एकमात्र सदस्य बचे थे।
सीपीआई माओवादियों का संगठन अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. मिसिर बेसरा देश के एकमात्र पोलित ब्यूरो सदस्य थे। 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य और सीपीआई-माओवादियों के प्रमुख देव ने आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले 21 मई 2025 को सुरक्षा बलों ने नांबला केशव राजू उर्फ बसवा राजू को मार गिराया था। माओवादियों के सचिव रहे गणपति पिछले आठ सालों से लापता हैं, खराब स्वास्थ्य के कारण कई बार उनकी मौत की अटकलें लगाई जा चुकी हैं।
आईबी लगातार नजर बनाए हुए थी
बताया जाता है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी लगातार बेसरा पर नजर रख रही थी. आईबी की सूचना पर मंगलवार को राज्य पुलिस मुख्यालय, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने संयुक्त रणनीति बनायी.
कई महीनों से चकमा दे रहा था
मिसिर बेसरा कई महीनों से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा था. मई में बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. मंगलवार को भी 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. सुरक्षा बलों को आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिसिर बेसरा की गतिविधियों की भी जानकारी मिली.
उसे पहली बार 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था.
मिसिर बेसरा को पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट पर हमला कर माओवादियों ने उन्हें छुड़ा लिया था. तब से बूढ़ापहाड़, कोल्हान और सारंडा में रहे।
150 से ज्यादा मामले दर्ज हैं
बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 150 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. एनआईए को भी दो मामलों में तलाश थी. झारखंड में बेसरा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है, जबकि ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस मिसिर बेसरा और उसके सहयोगियों को लेकर रांची के लिए रवाना हो गयी. इन तीनों के देर रात या बुधवार सुबह रांची पहुंचने की संभावना है.

