बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में मगरमच्छों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता और साहस की मिसाल पेश की है. गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय नहर में 10 से 12 मगरमच्छ आ गये, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया. पूर्व में कई जानलेवा घटनाओं के बाद बेलावां और सिरसिया पंचायत के ग्रामीणों ने मिलकर खेतों में सुरक्षित आवाजाही के लिए बांस का अस्थायी पुल खुद ही तैयार कर लिया. ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के खेती-किसानी के काम के लिए इसी रास्ते से गुजरना मजबूरी है. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों को मगरमच्छों के पकड़े जाने तक नहर के पास न जाने की चेतावनी दी है.
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में मगरमच्छों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता और साहस की मिसाल पेश की है. गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय नहर में 10 से 12 मगरमच्छ आ गये, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया. पूर्व में कई जानलेवा घटनाओं के बाद बेलावां और सिरसिया पंचायत के ग्रामीणों ने मिलकर खेतों में सुरक्षित आवाजाही के लिए बांस का अस्थायी पुल खुद ही तैयार कर लिया. ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के खेती-किसानी के काम के लिए इसी रास्ते से गुजरना मजबूरी है. वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों को मगरमच्छों के पकड़े जाने तक नहर के पास न जाने की चेतावनी दी है.




