
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के इस आदेश से इन परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

मामले की सुनवाई गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के उस आदेश पर स्टे लगा दिया, जिसके तहत संबंधित परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई की गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिनों का समय दिया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को काउंटर एफिडेविट के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इस दौरान सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लिया गया फैसला किस आधार पर किया गया।
कोर्ट के आदेश से मामले के याचिकाकर्ताओं को भी राहत मिली है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित याचिकाकर्ता तत्काल प्रभाव से अपने काम पर वापस लौटेंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगा।
दरअसल, झारखंड में JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों के आंदोलन और विरोध के बाद राज्य सरकार की ओर से कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया था। इन परीक्षाओं में कई अभ्यर्थी सफल भी हुए थे। परीक्षा रद्द किए जाने के बाद सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
इसी क्रम में परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के सरकार के आदेश के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सरकार के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके जरिए विभिन्न परीक्षाओं की नियुक्ति प्रक्रिया को समाप्त किया गया था। गुरुवार को इन याचिकाओं पर जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर तत्काल रोक लगाते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार के काउंटर एफिडेविट पर है। सरकार का जवाब दाखिल होने के बाद अदालत मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। फिलहाल कोर्ट के स्टे से संबंधित परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और परीक्षा रद्द करने से जुड़ा विवाद अदालत में विचाराधीन रहेगा।




