
गढ़वा: बिहार के रोहतास जिले में करीब 12 साल पुराने कथित हत्या के मामले ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। जिस शकुंतला देवी को वर्ष 2014 में मृत मान लिया गया था, वह झारखंड के गढ़वा जिले में जीवित मिली है। पुलिस ने उसे कांडी थाना क्षेत्र के लभरी गांव से बरामद किया है। महिला के जीवित मिलने के बाद 12 साल पुराने कथित हत्या मामले की जांच और पुलिस कार्रवाई पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
11 सितंबर को बिहार पुलिस अपने साथ ले गई
दरअसल, झारखंड में इन दिनों एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। इसी सिलसिले में महिला अपने वोटर वेरिफिकेशन से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए बिहार गई थी। इसी दौरान बिहार पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली कि जिस महिला को वर्ष 2014 में मृत घोषित कर दिया गया था, वह वास्तव में जीवित है। जानकारी सामने आने के बाद बिहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 11 सितंबर को महिला को गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र स्थित उसके गांव से बरामद किया और अपने साथ बिहार ले गई। पुलिस के अनुसार, वह वहां कांति देवी के नाम से रट्टू सिंह नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी। बरामदगी के बाद पुलिस उसे रोहतास लेकर आई और सासाराम कोर्ट में पेश किया।
मायके वालों ने की थी मौत की पुष्टि
वर्ष 2014 में शकुंतला देवी के लापता होने के बाद उनके भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि ससुराल में दहेज को लेकर शकुंतला को प्रताड़ित किया जाता था। इसी बीच डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव के पास नहर से एक महिला का शव बरामद हुआ था।
शकुंतला के भाई ने नहर से मिले शव की पहचान अपनी बहन के रूप में की थी। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करते हुए शकुंतला के पति अरुण मेहता, ससुर, जेठ समेत परिवार के आठ लोगों को आरोपी बनाया था। मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था और परिवार को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
मुकदमे के दौरान बेचनी पड़ी पुश्तैनी संपत्ति
शकुंतला के ससुराल पक्ष का दावा है कि वर्षों तक चले मुकदमे में परिवार को आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार के मुताबिक, केस से जुड़े खर्च और मामले को सुलझाने की कोशिश में उन्हें अपनी पुश्तैनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी।
अब सबसे बड़ा सवाल- नहर से मिला शव किसका था?
महिला के जीवित मिलने के बाद वर्ष 2014 के पूरे मामले की जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर पुलिस द्वारा बरामद महिला की पहचान शकुंतला देवी के रूप में सही साबित होती है, तो सबसे अहम सवाल यह है कि 2014 में नहर से मिला महिला का शव आखिर किसका था?
उस समय शव की पहचान शकुंतला के रूप में की गई थी और उसका पोस्टमार्टम भी कराया गया था। अब शकुंतला के जीवित मिलने के बाद पुलिस के सामने उस अज्ञात महिला की पहचान करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
पुलिस ने महिला के खिलाफ कथित तौर पर पुलिस को गुमराह करने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों में कार्रवाई शुरू की है। कोर्ट में पेशी के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। वहीं, 12 साल पुराने इस मामले में शव की पहचान कैसे हुई थी और उस समय जांच में किन तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया था, इसकी भी नए सिरे से जांच महत्वपूर्ण हो गई है।







