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रांची: बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले में गुरुवार को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन के बिंदु पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।
सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अधिवक्ता संजीव सहाय ने विशेष अदालत को बताया कि ईडी की ओर से अन-रिलाइड डॉक्यूमेंट्स (जिन दस्तावेजों पर अभियोजन पक्ष भरोसा नहीं कर रहा है) की सूची उन्हें गुरुवार को ही उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में इन दस्तावेजों का सत्यापन करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया गया।
खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अदालत के समक्ष इसी आधार पर समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि ईडी ने अन-रिलाइड डॉक्यूमेंट्स की सूची आज ही उपलब्ध कराई है, इसलिए दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। मुख्यमंत्री ने अपनी कुछ व्यक्तिगत कठिनाइयों का भी हवाला देते हुए अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। अब इसी दिन मामले में आरोप गठन के बिंदु पर आगे की बहस होगी।
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने अवैध अधिग्रहण, जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की है।
ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान बड़गाईं क्षेत्र में 8.86 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़े तथ्य सामने आए। हाईकोर्ट के आदेश में ईडी की ओर से जांच के दौरान जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित कई दस्तावेजों तथा बयानों का हवाला दिए जाने का उल्लेख है।
ईडी इस मामले में हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत/चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इससे पहले अदालत मामले के 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित कर चुकी है।
इनमें अंतू तिर्की, भानु प्रताप प्रसाद, विनोद कुमार सिंह, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, मोहम्मद इरशाद अख्तर, अफसर अली, मोहम्मद सद्दाम हुसैन और मोहम्मद इरशाद शामिल हैं।
इस मामले में हेमंत सोरेन ने निचली अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने पीएमएलए अदालत की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। 18 सितंबर 2026 को झारखंड हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग खारिज कर दी।





