
जमशेदपुर/कोलकाता:
लौहनगरी में बुधवार की देर रात वो हुआ जिसका अंदेशा बड़े-बड़े सूरमाओं को दिन भर से था। अरबों के कथित खेल पर केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) ने ऐसा शिकंजा कसा कि बिष्टुपुर के पॉश इलाके से लेकर कोलकाता के दफ्तरों तक हड़कंप मच गया। 734 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जीएसटी खेल में स्क्रैप जगत के रसूखदार चेहरे ज्ञानचंद उर्फ बबलू जायसवाल और उनके वारिस राज जायसवाल आखिरकार ईडी के हत्थे चढ़ ही गए। आधी रात 12:15 बजे की इस गिरफ्तारी के बाद शहर के एमजीएम अस्पताल में जो कुछ घटा, उसने किसी थ्रिलर फिल्म के क्लाइमैक्स को भी पीछे छोड़ दिया।
सुबह कोलकाता-टाटा में रेड, आधी रात को हथकड़ी
दिन निकलते ही जांच एजेंसी ने एक साथ दो राज्यों में समानांतर चक्रव्यूह रचा था। जमशेदपुर के बिष्टुपुर सहित तीन अलग-अलग लोकेशन और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के दो ठिकाने अचानक ईडी की रडार पर आ गए। चर्चा है कि टीम ने सीधे उस नब्ज पर हाथ रखा जहां से कागजों के फेरबदल की पटकथा लिखी जाती थी—यानी बबलू जायसवाल और उनके अकाउंटेंट के मुख्य गढ़। दिन भर चली मैराथन तलाशी और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जब रात का सन्नाटा पसरा, तो एजेंसी ने सीधे पिता-पुत्र को हिरासत में लेकर खेल खत्म करने का संकेत दे दिया।
एमजीएम में 30 मिनट का ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’
असली गहमागहमी गिरफ्तारी के बाद मेडिकल प्रोटोकॉल के दौरान सामने आई। आधी रात जब टीम दोनों को स्वास्थ्य जांच के लिए एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंची, तो इमरजेंसी वार्ड सियासी और कानूनी दांव-पेंच का अखाड़ा बन गया।
दवा और रिपोर्ट पर तकरार: जांच के दौरान बबलू जायसवाल भड़क उठे। उन्होंने अधिकारियों और डॉक्टरों पर आरोप मढ़ा कि बीपी खतरनाक स्तर पर होने के बावजूद खानापूर्ति की जा रही है और कागजों में हेरफेर हो रहा है।
डिप्रेशन का हवाला: कारोबारी का दावा था कि उनकी जरूरी मेडिकल जरूरतें और डिप्रेशन की दवाएं तक रोक दी गईं।
एजेंसी बनाम आरोपी: करीब आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में तीखी बहस और तनातनी का माहौल बना रहा। हालांकि, तमाम हो-हल्ले और विरोध के बावजूद ईडी के कड़े तेवरों के आगे किसी की न चली और टीम जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों को सीधे अपने साथ रवाना हो गई।
हाथ लगे डिजिटल राज और दस्तावेजों के बंडल
सूत्रों की मानें तो बुधवार तड़के से शुरू हुई इस रेड में टीम ने कई बेहद संवेदनशील दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड्स सीज किए हैं। दावा किया जा रहा है कि फर्जी इनवॉयस और इनपुट टैक्स क्रेडिट के जिस 734 करोड़ के मायाजाल की जांच चल रही थी, उसकी अहम कड़ियां अब ईडी के हाथ में हैं। बहरहाल, आधी रात की इस धड़पकड़ के बाद शहर के कई अन्य कारोबारी हलकों में भी खलबली मची हुई है।




