
जमशेदपुर: झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला दोनों जिलों में बढ़ रहे अपराध और दो बड़ी घटनाएं एक झारखंड और बिहार की सबसे बड़ी बैंक डकैती और दूसरा मरीन ड्राइव सोनारी बिंदल मॉल में 11 राउंड फायरिंग झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता समेत चार लोगों के घायल होने के मामले में अद्यतन जानकारी ली। गुनहगारों को पकड़ने के लिए पुलिस के द्वारा किए जा रहे उपायों की समीक्षा की और क्राइम कंट्रोल के लिए आवश्यक निर्देश दी। इसी बीच उनके लौटते ही शहर में एक बार फिर शांत फिजाओं में जब घड़ी की सुइयां रात के सवा ग्यारह बजा रही थीं, तभी ओल्ड बाराद्वारी की फुलबस्ती अचानक थर्रा उठी। सन्नाटे को चीरती बारूद की गंध, चार-पांच राउंड अंधाधुंध फायरिंग और फिर गूंजती चीख-पुकार—एक पल के लिए लगा मानो बस्ती में कोई खुली जंग छिड़ गई हो। निशाना बने मो. राजा, जो चंद लम्हे पहले घर के बाहर बेफिक्र होकर फोन पर बतिया रहे थे, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
शाम की रंजिश, रात का बदला
सूत्रों की मानें तो इस खूनी खेल की पटकथा घंटों पहले ही लिखी जा चुकी थी। शाम ढलते ही देवनगर आश्रम के पास एक चिंगारी सुलग चुकी थी। साकची के इस्मायलु और काशीडीह के कोदू के साथ राजा की तकरार इतनी बढ़ी कि नौबत मारपीट और हंगामे तक जा पहुंची। भीड़ के बीच से किसी तरह बच-बचाकर राजा अपने घर फुलबस्ती तो पहुंच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि बदले की आग पीछा करते हुए दहलीज तक आ पहुंचेगी।
सफेद स्कूटी और ट्रिगर पर उंगलियां
रात के 11:15 बजे। घर के बाहर फोन कान से लगा था और सामने से सफेद रंग की स्कूटी पर मौत सवार होकर आई। राजा जब तक माजरा समझ पाते, हमलावरों ने पिस्तौल तान दी। एक के बाद एक ताबड़तोड़ चार से पांच राउंड गोलियां दाग दी गईं। दो गोलियां सीधे राजा की बांह को चीरती निकल गईं। राजा लहूलुहान होकर जमीन पर गिरे और हमलावर एमजीएम मोड़ की गलियों में हवा की तरह गायब हो गए।
पुलिस की दौड़-धूप, इलाके में उबाल
सूचना की आग फैलते ही सीतारामडेरा थाना पुलिस के सायरन से इलाका गूंज उठा। मौके से दो जिंदा सबूत—खाली खोखे बरामद हुए। आनन-फानन में राजा को एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है।
इधर, खाकी वर्दी हरकत में आ चुकी है। पुराने हिस्ट्रीशीटर और रंगदारी-आर्म्स एक्ट के पुराने खिलाड़ी इस्मायलु और उसके साथी कोदू की तलाश में मानगो से लेकर आजादनगर और काशीडीह की गलियों में छापेमारी का दौर जारी है।
उधर, फुलबस्ती की गलियों में अब भी सुलगता हुआ गुस्सा तैर रहा है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—आखिर कब थमेगा इन बेलगाम अपराधियों का तांडव?



