
जमशेदपुर: जब हाथों में कला का हुनर और दिल में भक्ति का भाव हो, तो मंच सड़क बन जाता है और दर्शक मंत्रमुग्ध। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और भव्य नजारा बीते 30 सितंबर को लौहनगरी की सड़कों पर देखने को मिला, जिसकी गूंज आज भी शहरवासियों की जुबान पर है। मौका था ‘श्री बाला गणपति विलास कदमा’ के भव्य गणेश महोत्सव विसर्जन जुलूस का, जहां ‘जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम’ के बाल कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुतियों से पूरे शहर को झूमने पर मजबूर कर दिया।
धार्मिक झांकियों से गुलजार हुआ विसर्जन मार्ग
रंकिनी मंदिर से शाम 6 बजे निकली भव्य विसर्जन शोभायात्रा कदमा फुटबॉल मैदान, बिस्टुपुर थाना और वोल्टास बिल्डिंग होते हुए खरखाई नदी घाट तक पहुंची। इस पूरे मार्ग पर यदि किसी ने राहगीरों और श्रद्धालुओं की नजरें सबसे ज्यादा अपनी ओर खींचीं, तो वे थीं जयालक्ष्मी नाट्य कला मंदिरम के 8 चुनिंदा कलाकारों द्वारा सजाई गई तीन विशेष झांकियां।
सूर्य देव का तेज: पहली झांकी में निरंजन कुमार सिंह ने भगवान भास्कर (सूर्य देव) के दिव्य स्वरूप को सजीव कर दर्शकों को अभिभूत कर दिया।
भक्ति और शक्ति का संगम: दूसरी झांकी में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपनी पीठ पर बैठाकर लंका की ओर उड़ान भरते महावीर हनुमान का दृश्य दिखा। इसमें राजेश कुमार (श्री राम) और नितिन कुमार (श्री लक्ष्मण) के सशक्त अभिनय ने लोगों को त्रेतायुग की याद दिला दी।
शांति और करुणा का संदेश:
तीसरी झांकी में भगवान बुद्ध के स्वरूप में जय कुमार विराजमान थे, वहीं उनके पीछे नन्हे शिष्य बने आरव, आर्यन, कृष्णा और सुशांत ने “बुद्धम् शरणम् गच्छामि” के सुमधुर गायन से विसर्जन मार्ग के माहौल को पूर्णतः आध्यात्मिक व शांतिमय बना दिया।
परदे के पीछे का कमाल
इन झांकियों की भव्यता के पीछे कलाकारों के मेकअप और परिधान की विशेष भूमिका रही। पवन कुमार, दिशा कुमारी और नेहा दत्ता ने अपने कुशल वेश-भूषा और रूप सज्जा से पात्रों में ऐसा प्राण फूंका कि लोग कलाकारों को एकटक देखते रह गए।
संस्था के होनहारों को मिला सम्मान
सड़क पर अपनी कला का लोहा मनवाने वाले इन सभी नवोदित और अनुभवी कलाकारों के सम्मान में आज, 4 अक्टूबर को संस्था द्वारा एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर संस्था के संरक्षक श्री आनंद राव उपस्थित रहे। उन्होंने सभी बाल कलाकारों और सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। संरक्षक आनंद राव ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में कला और संस्कृति की ऐसी सुंदर प्रस्तुति समाज के लिए गर्व का विषय है।




