
टाटानगर स्टेशन पर डीजीएम से तल्ख बातचीत, जलियांवाला बाग एक्सप्रेस को 3 महीने रद्द करने के फैसले पर मचेगा घमासान
जमशेदपुर: कोहरे की आड़ लेकर ट्रेनों को अचानक पटरी से उतार देने की रेलवे की पुरानी कार्यशैली ने इस बार लौहनगरी जमशेदपुर में बड़ा जनाक्रोश खड़ा कर दिया है। टाटा से अमृतसर जाने वाली लाइफलाइन मानी जाने वाली जलियांवाला बाग एक्सप्रेस को 2 दिसंबर से 28 फरवरी तक रद्द किए जाने के आदेश ने सिख समुदाय समेत पूरे शहर को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। सोमवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई जब सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) के 31 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण पूर्व रेलवे के उप महाप्रबंधक (DGM) मनीष जैन और डीआरएम अरुण हुंरिया को घेरते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कमेटी ने रेल प्रशासन के इस फैसले को सरासर लापरवाही और मनमानी करार देते हुए साफ शब्दों में दो-टूक चेतावनी दी है: “मांगें नहीं मानी गईं तो दुर्गा पूजा के बाद पूरे क्षेत्र में रेल चक्का जाम होगा, अब ज्ञापन का दौर खत्म, सीधी आर-पार की लड़ाई होगी।”
आदर भी दिया, तेवर भी दिखाए: शॉल भेंट कर थमाई चेतावनी
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे सीजीपीसी के प्रधान भगवान सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने पहले तो रेल शिष्टाचार निभाते हुए डीजीएम मनीष जैन और डीआरएम को शॉल व बुके भेंट कर सिख समाज की ओर से सम्मानित किया, लेकिन इसके तुरंत बाद माहौल पूरी तरह गरमा गया। प्रतिनिधिमंडल ने तीखे लहजे में सवाल उठाया कि आखिर हर साल कुहासे का बहाना बनाकर इसी ट्रेन पर कैंची क्यों चलाई जाती है?
प्रतिनिधिमंडल ने रेल अधिकारियों के सामने अपनी दो टूक मांगें रखीं:
जलियांवाला बाग एक्सप्रेस को रद्द करने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए और इसे सप्ताह में चार दिन चलाया जाए।
टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस को पूर्व की तरह प्रतिदिन टाटानगर रेलवे स्टेशन से नियमित बहाल किया जाए।
“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए”: रेल अधिकारियों ने दिया सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा
अचानक उपजे भारी विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच डीजीएम मनीष जैन ने प्रतिनिधिमंडल को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उठाई गई मांगों पर रेलवे मुख्यालय स्तर पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जब कमेटी ने 7 अक्टूबर को चक्रधरपुर जाकर डीआरएम कार्यालय का घेराव करने की योजना का जिक्र किया, तो डीआरएम तरुण हुंरिया ने खुद बैकफुट पर आते हुए कहा कि कमेटी को आने की आवश्यकता नहीं है, वे स्वयं 7 अक्टूबर को जमशेदपुर आकर प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे और समाधान निकालेंगे।
दलीय दीवारें टूटीं: मंच पर एकजुट हुआ पूरा जमशेदपुर
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि रेलवे के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ शहर के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी सीमाओं को भुलाकर सेंट्रल गुरुद्वारा कमेटी के सुर में सुर मिलाया। ज्ञापन सौंपने वालों में शहर के प्रमुख नेता और विभिन्न दलों के प्रतिनिधि शामिल रहे, जिनमें अवतार सिंह संधू, गुरमीत सिंह, गौतम बोस, नवजोत सिंह सोहल, निर्मल दादा, राजकुमार दास और सुखदेव सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे।

समाज का भारी जमावड़ा
प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सीजीपीसी और सिख समाज के कई दिग्गज चेहरे स्टेशन परिसर में डटे रहे। इनमें चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह, वरीय उपाध्यक्ष नरेंद्र पाल सिंह, सुरजीत सिंह खुशीपुर, चंचल सिंह, हरविंदर सिंह मंटू, महासचिव अमरजीत सिंह, गुरचरण सिंह बिल्ला, कोषाध्यक्ष गुरनाम सिंह बेदी, गुरु शरण सिंह, अजीत सिंह गंभीर, जोगिंदर सिंह जोगी, प्रधान परमजीत सिंह रोशन, प्रीतम सिंह, लखविंदर सिंह, रविंद्र सिंह, मलकीत सिंह, अवतार सिंह सोखी, गुरमेल सिंह, सलाहकार सुरेंद्र सिंह शिंदे, सुखदेव सिंह बिट्टू, ज्ञानी कुलदीप सिंह, सुखदेव सिंह मली, सुखविंदर सिंह, सरबजीत सिंह ग्रेवाल, गुरमीत सिंह, बलविंदर सिंह, अमन सिंह और महेंद्र पाल सिंह उपस्थित थे।
साथ ही सेंट्रल सिख स्त्री सत्संग सभा की चेयरमैन कमलजीत कौर, संरक्षक दलबीर कौर, सतनाम कौर और जसवीर कौर सहित कई महिला प्रतिनिधियों ने भी मोर्चा संभाला।




