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झारखंड समेत देशभर में व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा पर आरटीआई कार्यकर्ता संघ ने जताई गंभीर चिंता
शिकायत पर 24 घंटे के अंदर FIR और सुरक्षा देने की रखी 4 सूत्रीय मांग
जमशेदपुर:
देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी राष्ट्रीय मुहिम शुरू हुई है। आरटीआई कार्यकर्ता संघ के केंद्रीय महासचिव और जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विधिक मांग पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने देश भर में प्रताड़ित हो रहे सजग नागरिकों की सुरक्षा के लिए अविलंब एक समर्पित और केंद्रीयकृत “फास्ट ट्रैक कंप्लेंट पोर्टल” गठित करने की मांग उठाई है।
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में श्री मंडल ने ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ और ‘व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम, 2014’ के जमीनी क्रियान्वयन पर गहरा दुख व्यक्त किया।
जानलेवा हमलों और पुलिसिया लापरवाही पर उठाए सवाल
कृतिवास मंडल ने कहा कि झारखंड सहित पूरे देश में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं को जानलेवा हमलों, हत्याओं, धमकियों और फर्जी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब कोई पीड़ित कार्यकर्ता सुरक्षा की गुहार लेकर थाने जाता है, तो भ्रष्ट तंत्र और रसूखदारों के दबाव में एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती। जांच में की जाने वाली यह जानबूझकर देरी शिकायतकर्ता की जान को और खतरे में डाल देती है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता राष्ट्र की संपत्ति हैं, जो सरकार के हजारों करोड़ रुपये की लूट रोकते हैं। ऐसे नागरिकों की अनदेखी करना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रपति के समक्ष रखी गई 4 मुख्य मांगें:
केंद्रीयकृत पोर्टल की स्थापना: देश के किसी भी हिस्से में खतरे का सामना कर रहे कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स के लिए त्वरित शिकायत निवारण पोर्टल बने।
शीर्ष स्तर पर लाइव मॉनिटरिंग: पोर्टल पर आने वाली शिकायतों की निगरानी सीधे केंद्रीय गृह सचिव, संबंधित राज्य के गृह सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर मामलों को दबाया न जा सके।
24 घंटे में FIR और सुरक्षा: शिकायत दर्ज होने के अधिकतम 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कार्यकर्ता को सुरक्षा दी जाए और 15 दिनों में कार्रवाई की प्रोग्रेस रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड हो।
पहचान की पूर्ण गोपनीयता: भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले नागरिकों की पहचान पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखी जाए।
श्री मंडल ने उम्मीद जताई कि इस ऐतिहासिक पोर्टल की शुरुआत से सामाजिक कार्यकर्ताओं की जान बचेगी और आम जनता में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ बेखौफ खड़े होने का हौसला बढ़ेगा।




