
‘डिमना बस्ती जल विकास समिति’ का गठन कर प्रशासन को अल्टीमेटम, नेताओं के झूठे आश्वासनों से त्रस्त जनता ने भरी आर-पार की हुंकार
जमशेदपुर: चुनावी मौसम में हर चौखट पर हाथ जोड़कर ‘हर घर नल’ पहुंचाने की कसमें खाने वाले नेताओं की हकीकत चुनाव खत्म होते ही हवा हो जाती है। जमशेदपुर की डिमना बस्ती की बदहाली इसका जीता-जागता सबूत है, जहां सालों से नल सूखे हैं और जनता की आंखों से आंसू नहीं सूख रहे। इस लंबे पेयजल संकट और हुक्मरानों की बेरुखी से त्रस्त बस्तीवासियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया।
सोमवार को जन विकास मंच के अध्यक्ष व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु की अगुवाई में स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा, जहां वर्षों की उपेक्षा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंका गया।
चुनावी वादों की खुली पोल, बूंद-बूंद को तरसती जिंदगी
बैठक में जमा हुए सैकड़ों लोगों का दर्द तब छलक उठा जब उन्होंने जनप्रतिनिधियों की नीयत पर तीखे सवाल उठाए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव आते ही हर दल के नेता पानी का रोना रोते हैं और जीतते ही गायब हो जाते हैं। नतीजा यह कि आज भी परिवार की माताओं और बहनों को मीलों चलकर माथे पर बर्तन ढोने पड़ रहे हैं।
‘डिमना बस्ती जल विकास समिति’ का ऐलान, 1000 लोग करेंगे घेराव
इस जनआक्रोश को एक मजबूत संगठन का रूप देते हुए बैठक में सर्वसम्मति से ‘डिमना बस्ती जल विकास समिति’ के गठन का फैसला लिया गया।
मंच को संबोधित करते हुए सौरभ विष्णु ने जनता को आईना दिखाते हुए कहा कि अब तक लोग बिखरे हुए थे, जिसका फायदा सियासतदान उठाते रहे। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि हक मांगने से नहीं, छीनने से मिलेगा। बैठक में तय हुआ कि शुरुआती चरण में 1,000 प्रभावित लोगों की एक जुटता के साथ संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के दफ्तर का घेराव किया जाएगा। यदि इसके बाद भी अफसरों की नींद नहीं टूटी, तो पूरा शहर एक ऐतिहासिक और उग्र जनआंदोलन का गवाह बनेगा।
बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय करने वालों में मुख्य रूप से सुमन शर्मा, बप्पी दत्ता, सनातन टुड्डू, विजय कुमार, विकास महतो, धनु मांझी, कालीपद गोप, भोलानाथ हांसदा, निर्मल प्रामाणिक, रेखा दत्ता, मीरा देवी समेत भारी संख्या में स्थानीय महिलाएं और युवा मौजूद रहे।




