झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अदालत में मंगवाई कई ब्रांड के गुटखे और..

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने प्रदेश सरकार के उस दावे और कानून की कलई खोल दी। जिसमें प्रदेश में वर्ष 2017 से गुटखा के पूरी तरह प्रतिबंध होने बात कही जा रही है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश ने एक गैर सरकारी संगठन के द्वारा न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने अदालत के कर्मचारी से शुक्रवार को बाजार से कुछ ही मिनटों में कई ब्रांड के गुटखे मंगवाकर राज्य सरकार के गुटखा प्रतिबंध के दावे की पोल खोल दी और सरकार को खरी-खोटी सुनाई। साथ ही नाराजगी प्रकट करते हुए अदालत ने सरकार को अगली तिथि को राज्य में गुटखा की बिक्री पूरी तरह बंद करने का आदेश देते हुए शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि शपथपत्र में यह पूरी तरह से स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि राज्य में गुटखा की बिक्री अब नहीं हो रही है।

खबरों के मुताबिक झारखंड में पान मसाला और गुटखा की बिक्री को लेकर फरियाद फाउंडेशन ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए कहा है कि प्रदेश में गुटखा पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी राज्य में गुटखे की बिक्री हो रही है और सरकार कुछ नहीं कर रही है।

हुआ यूं कि इस मामले में सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डा. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने खाद्य आपूर्ति विभाग के विशेष सचिव से पूछा कि प्रतिबंधित होने के बाद भी गुटखा बाजार में क्यों बिक रहा है तो सचिव ने कहा कि राज्य में गुटखे की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस पर चीफ जस्टिस ने असंतोष जताया और एक कर्मचारी को बाजार भेजकर गुटखा लाने को कहा। 10 मिनट में ही कर्मचारी ने पांच- छह ब्रांड का गुटखा लाकर कोर्ट में रख दिया। इस पर अदालत ने सचिव से पूछा कि यह कैसा प्रतिबंध है, आप खुद देख लीजिए। इसके बाद विशेष सचिव ने आश्वस्त किया कि इसकी जांच कर अविलंब कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद अदालत ने कहा कि बाजार में इतनी सस्ती मौत बिक रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। गुटखा में जर्दा मिलाकर लोग सेवन कर रहे हैं। भले ही यह अलग-अलग बिक रहा हो, लेकिन बाजार में जहर ही तो बिक रहा है। बिक्री पर रोक होने के बाद भी यह आसानी से बाजार में उपलब्ध है।न्यायालय ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या सरकार सिर्फ कागज पर ही काम कर रही है. पीठ ने कहा कि जमीनी हकीकत या तो सरकार जानती नहीं या जान कर आंखें बंद किए हुए है।

अदालत ने सरकार से पूछा कि गुटखे पर प्रतिबंध लगाने के पहले पूर्व सरकार ने कोई अध्ययन किया था या नहीं। साथ ही यह सवाल भी दागा कि क्या इस बात का रिकार्ड सरकार के पास है कि गुटखा कहां से पहुंच रहा है। गुटखा का सेवन करने से बीमार हो रहे लोगों की संख्या कितनी बढ़ी है। अदालत ने इसकी विस्तृत जानकारी शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत की पीठ ने विभाग के विशेष सचिव चंद्रकिशोर ओरांव से पूछा, यह कैसा प्रतिबंध है, स्वयं देख लीजिए कि जो सरकार ने प्रतिबंधित कर रखा है वह सब कुछ सुलभ है।इस पर विशेष सचिव ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि इस मामले की जांच कर अविलंब कार्रवाई की जाएगी।

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