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हसदेव अरण्य के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन

On: January 24, 2024 11:29 AM
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झारखंड वार्ता न्यूज़

महुआडांड़ (लातेहार):- हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई के खिलाफ वहाँ के आंदोलनकारियों के समर्थन में केन्द्रीय जन संघर्ष समिति, लातेहार-गुमला, ने आज बुधवार को दोपहर 12-2 बजे तक मानवश्रृंखला बनाकर हसदेव के समर्थन में “हसदेव बचाओ” , “SAVE HASDEV” की तख्ती लेकर खड़े हुए।

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज व पलामू व्याघ्र परियोजना के प्रभावितों ने महुआडाँड़-डालटेनगंज मुख्य मार्ग, शास्त्री चौक, बोहटा, बारेसाँड़, गारु। महुआडाँड़ –रांची मुख्यपथ में कुरुंद, चोरमुंडा, पकरीपाठ, बनारी। महुआडाँड़-गुमला पथ में रजावल, नवाडीह, चैनपुर और गुमला के सिसई रोड में मानवश्रृंखला बनाकर हसदेव बचाओ आंदोलन का समर्थन किया गया।

ज्ञात हो कि छतीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित हसदेव अरण्य भारत के सबसे बड़े वन क्षेत्रों में से एक है। हसदेव जंगल 1,70,000 (एक लाख सत्तर हजार) हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहाँ अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, जानवर और पक्षी पाए जाते हैं। यह जंगल कई दुर्लभ और लुप्त होते पशु-पक्षियों एवं वनस्पतियों को अपने गोद में शरण दिए हुए है। इसी जंगल में हसदेव नदी बहती है, जिसे छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा भी कहा जाता है। इसी हसदेव नदी में मिनीमाता बाँगो बांध का निर्माण किया गया है। हसदेव अरण्य में कई आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। जो यहाँ के पारंपरिक निवासी हैं। जिन्होंने अभी तक इस जंगल के वनस्पति एवं पशु पक्षियों के साथ सहअस्तित्व का जीवन जीते हुए इन्हें संरक्षित रखा है।

छतीसगढ़ एवं केंद्र सरकार की मिलीभगत से कोयला खनन के नाम पर हसदेव आरण्य में लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है। जिसका वहाँ के आदिवासी व छतीसगढ़ के लोगों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। लेकिन सरकार द्वारा पेड़ों की कटाई नहीं रोकी जा रही है। हसदेव अरण्य केवल छतीसगढ़ ही नहीं पूरे भारत देश के लिए पर्यावरण दृष्टि से महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। आज के जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हसदेव अरण्य का संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य भी है। मौके पर जेरोम जेराल्ड कुजूर, सचिव अनिल मनोहर, सदस्य केन्द्रीय जन संघर्ष समिति लातेहार-गुमला के साथ कई अन्य लोग मौजूद थे।

Satyam Jaiswal

सत्यम जायसवाल एक भारतीय पत्रकार हैं, जो झारखंड राज्य के रांची शहर में स्थित "झारखंड वार्ता" नामक मीडिया कंपनी के मालिक हैं। उनके पास प्रबंधन, सार्वजनिक बोलचाल, और कंटेंट क्रिएशन में लगभक एक दशक का अनुभव है। उन्होंने एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से शिक्षा प्राप्त की है और विभिन्न कंपनियों के लिए वीडियो प्रोड्यूसर, एडिटर, और डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है। जिसके बाद उन्होंने झारखंड वार्ता की शुरुआत की थी। "झारखंड वार्ता" झारखंड राज्य से संबंधित समाचार और जानकारी प्रदान करती है, जो राज्य के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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