रुद्राक्ष यज्ञ के छठा दिन आवाहित देवताओं का पूजन और पाठ किया गया

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दिनेश बनर्जी
सिल्ली:- आम बगान लोदमु उत्तरी सिल्ली, राँची में चल रहे रूद्र महायज्ञ के षष्ठम दिवस पर काशी से पधारे वैदिक विद्वानो के द्वारा आवाहित देवताओं का पुजन, पाठ, हवन और आरती का कार्य संपन्न किया गया। संध्याकालीन सत्र में जगद्गुरु वनांचलधर्मपीठाधीश्वर स्वामी दीनदयालजी महाराज ने कहा कि सनातनधर्मी से बड़ा प्रकृति पुजक कोई नहीं है। हम पशुओं का देवस्वरुप में पुजन करते है। गाय को माता के रुप में, वृषभ को शिवजी के वाहन के रुप में, सिंह को दुर्गाजी के वाहन के रुप में, गरूड़ को विष्णु के वाहन के रुप में, हंस का ब्रम्हा जी के वाहन के रुप में। यहाँ तक कि हम गदहे का भी पूजन करते हैं शीतला माता के वाहन के रुप में। हम वृक्षो का भी पुजन पीपल, बरगद, आँवला, शमी, तुलसी आदि का पुजन देवस्वरुप में करते हैं ।हम नदियों का भी माता के रुप में जैसे गंगा माँ, यमुना महारानी, नर्मदा महारानी देवस्वरुप में पुजन करते हैं। हम तो नाग को भी नागपंचमी के दिन दुध और लावा का भोग लगाते है तो हमसें बड़ा प्रकृतिपूजक कौन है? समाधी बाबा ने कहा कि राम ही केवल प्रेम प्यार। भगवान की प्राप्ति प्रेम से ही होती है। भक्त के वश में भगवान होते हैं। चित्रकुट से पधारी हुई रामलीला के द्वारा सीताहरण की दिब्य लीला का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया। इस महायज्ञ में नौ दिवसीय अखण्ड भंडारे का भी आयोजन किया गया है। समस्त यज्ञ समिति के पदाधिकारी और ग्रामीण और क्षेत्रीय जनता इस महायज्ञ को सफल बनाने हेतु तन मन धन से लगे हुये हैं।