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मशहूर देवघर बाबा धाम शिवलिंग में सीमेंट पोती गई,पंडा समाज में आक्रोश, डीसी ने दिए जांच के आदेश

On: December 9, 2024 6:12 AM
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देवघर :12 ज्योतिर्लिंगों में से एक झारखंड के देवघर में स्थित एक और ज्योर्तिलिंग बाबा वैद्यनाथ के शिवलिंग पर सीमेंट पोतने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले को लेकर पंडा समाज में काफी आक्रोश है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह काम जिला प्रसाशन के तरफ से किया गया है। ऐसे में पंडा धर्म रक्षिणी सभा ने कहा कि मंदिर में पौराणिक और परंपरागत नियमों को ताक पर रखकर जिला प्रशासन काम कर रही है।जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। वहीं देवघर के बाबा मंदिर के गर्भ गृह में बने शिवलिंग को लेकर इस तरह के मामले सामने के बाद इनलोगों ने काफी आपति भी जताई है।


वहीं पूरे मामले पर देवघर के उपायुक्त विशाल सागर ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली वैसे ही मंदिर प्रभारी को जांच कर प्रतिवेदन जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा उपायुक्त ने निर्देश देते हुए कहा कि जिनके द्वारा भी बिना सूचना के मंदिर के गर्भ गृह में कार्य किया जा रहा है।उनपर नियमसंगत कार्रवाई भी की जाएगी।

बता दें कि मंदिर के गर्भ गृह में किसी भी तरह की कार्य किए जाने से पहले श्राइन बोर्ड और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को दी जाती है उसके बाद ही कोई काम किया जाता है। ऐसे में बिना किसी ठोस निर्णय और आदेश के इस तरह के काम किए जाने को लेकर काफी आक्रोश का भावना कायम हो गया है। फिलहाल जांच कि बात कही जा रही है।

गौरतलब हो कि, सभी ज्योतिर्लिंग में त्रिशूल विराजमान है, लेकिन देवघर के बाबा बैजनाथ धाम मंदिर के शिखर पर पंचशूल विराजमान है. साल में एक बार इस पंचशूल की पूजा भी की जाती है। शास्त्र में ऐसा उल्लेख है कि बाबा बैद्यनाथ धाम पूर्वोत्तर के क्षेत्र में विराजमान है और यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां बाबा बैद्यनाथ के साथ मां भगवती भी विराजमान हैं।

इस मंदिर परिसर में बैद्यनाथ मंदिर के साथ कुल 22 मंदिर हैं, जिसके शिखर पर पंचशूल विराजमान है। चशूल के पीछे की कथा बताते हुए तीर्थ पुरोहित कहते हैं कि लंकापति रावण ने अपने गुरु शुक्राचार्य से पंचवक्त्रम निर्माण की विद्या सीखी थी। इसी कारण रावण ने लंका के चारों ओर पंचशूल लगाया था. पंचशूल लगाने से रावण की शक्ति बढ़ गई. रावण ने उसी पंचशूल को बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शीर्ष पर भी लगाया था, ताकि मंदिर को कोई क्षति न पहुंचे। बाद में अगस्त मुनि ने श्रीराम को पंचशूल ध्वस्त करने की विधि बताई थी।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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