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पलामू से चोरी गई कथित रूप से करोड़ की हथिनी बिहार से बरामद

On: September 30, 2025 12:08 PM
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पलामूः पलामू से चोरी हुई मादा हाथी जयमति को बिहार के छपरा से बरामद किए जाने की खबर आ रही है। जिसके मालिक ने चोरी के समय इसकी कीमत तकरीबन एक करोड़ बताई थी। खास बात यह थी कि हाथी में चिप भी लगा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छपरा के अमनौर से रेस्क्यू किया गया है।हथिनी को अमनौर के पहाड़पुर के रहने वाले गोरख सिंह नामक व्यक्ति को 27 लाख रुपए में बेचा गया था।

गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर के रहने वाले नरेंद्र कुमार शुक्ला ने 12 सितंबर को पलामू के मेदिनीनगर के सदर थाना में एक आवेदन दिया था और जयमति नामक हथिनी की चोरी की शिकायत की थी. पूरे मामले में पलामू के सदर थाना की पुलिस अनुसंधान कर रही थी. हाथी में चिप भी लगा हुआ था.

इसी क्रम में पलामू पुलिस को सूचना मिली. जिसके बाद एसपी के निर्देश पर टीम का गठन किया गया था. पलामू के सदर थाना की पुलिस को सूचना मिली थी कि हथिनी बिहार के छपरा के अमनौर के इलाके में एक व्यक्ति को बेचा गया है. इसी सूचना के आलोक में सदर थाना की पुलिस सोमवार बिहार गई और हाथी को रिकवर किया. रिकवर करने में स्थानीय थाना और छपरा के वन विभाग ने भी सहयोग किया.

जिस वक्त मामला दर्ज किया गया था उस वक्त हथिनी की कीमत एक करोड़ रुपए बताई गयी थी. पलामू के सदर थाना प्रभारी लालजी ने बताया कि पुलिस के अनुसंधान में कई बातों की जानकारी मिली है. शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार शुक्ला ने तीन अन्य पार्टनर के साथ मिलकर 40 लाख रुपए में हथिनी को खरीदा था. अन्य तीन पार्टनरों ने नरेंद्र कुमार शुक्ला की जानकारी के बिना महावत के साथ मिलकर बिहार के छपरा में हथिनी को 27 लाख रुपए में बेच दिया था. महावत तीन अन्य पार्टनर के साथ मिल गया था.

जिस वक्त एफआईआर दर्ज किया गया था, उस वक्त बताया गया था कि 11 अगस्त को नरेंद्र कुमार शुक्ला पलामू के जोड़कर के इलाके में पहुंचा था. जहां उन्होंने हथिनी और महावत से मुलाकात की थी. 13 अगस्त को वह दोबारा लौटे तो देखा कि हथिनी और महावत गायब है. काफी खोजबीन के बाद भी हथिनी नहीं मिली इसके बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाया था.

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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