नई दिल्ली/बीजिंग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को एक बार फिर विदेश दौरे पर रवाना हुए। इस बार उनका दो देशों जापान और चीन का दौरा खासा चर्चा में है। खासतौर पर चीन की यात्रा पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं, क्योंकि बीते कुछ वर्षों से सीमा विवाद और कूटनीतिक मतभेदों के चलते भारत-चीन संबंधों में खटास आ गई थी। प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला चीन दौरा है, जहां वह 31 अगस्त से 1 सितंबर तक ठहरेंगे।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक तथाकथित ‘सीक्रेट लेटर’ सुर्खियों में है, जिसे कथित तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम भेजा था, लेकिन जल्द ही उसका संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचा। यही पत्र दोनों देशों के बीच हालिया गर्मजोशी की अहम वजह माना जा रहा है।
लेटर में क्या लिखा था?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग ने अपने निजी पत्र में स्पष्ट किया कि यदि भारत और अमेरिका ऐसा कोई समझौता करते हैं जिससे चीन के हित प्रभावित हों, तो बीजिंग को चिंता होगी। साथ ही उन्होंने भारत को सीधे संवाद का भरोसा भी दिया। इतना ही नहीं, शी ने अपने एक भरोसेमंद अधिकारी का नाम भी साझा किया, जिसे दोनों देशों के बीच आगे होने वाली वार्ताओं का जिम्मा सौंपा गया है।
पृष्ठभूमि: अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और भारत
जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ अटैक किया था और भारत पर भी डबल टैरिफ लागू कर दिए थे, तब विश्व राजनीति में अचानक नए समीकरण बनने लगे। ऐसे समय में बीजिंग ने भारत से सीधा संवाद बढ़ाकर संकेत दिया कि वह दिल्ली को कूटनीतिक रूप से अपने करीब लाना चाहता है।
रिश्तों में पिघलती बर्फ
पत्र भेजे जाने के बाद दोनों देशों के बीच कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं।
सीधी फ्लाइट्स की शुरुआत: जल्द ही भारत और चीन के बीच यात्रियों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होंगी।
व्यापारिक रियायतें: चीन ने भारत के लिए यूरिया की शिपमेंट पर लगी रोक हटाई।
वीजा सुविधा: भारत ने चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा जारी करना दोबारा शुरू किया।
इन घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी अब धीरे-धीरे कम हो रही है और नए अवसरों की संभावना बन रही है।
दौरे से उम्मीदें
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से न केवल भारत-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, बल्कि एशियाई क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर भी बड़े फैसले सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस यात्रा से अमेरिका, भारत और चीन के बीच त्रिकोणीय कूटनीति पर भी गहरा असर पड़ेगा।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक ‘सीक्रेट लेटर’ जिसने भारत-चीन संबंधों को पुनर्जीवित किया

