हैदराबाद: तेलंगाना के जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यहां कथित तौर पर करीब 300 आवारा कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इस मामले में पुलिस ने गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट की शिकायत के मुताबिक, सरपंच ने दिसंबर 2025 में हुए पंचायत चुनाव के दौरान गांव को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने का वादा किया था। आरोप है कि इसी वादे को पूरा करने के लिए सरपंच ने कुछ लोगों को कुत्तों को मारने के लिए काम पर रखा, जिन्होंने योजनाबद्ध तरीके से जहरीले इंजेक्शन देकर और खाने के चीजों में जहर देकर उनकी हत्या की।
दफनाई गई जमीन से निकाले गए दर्जनों शव
पुलिस जांच के दौरान जब संदिग्ध स्थानों की खुदाई कराई गई तो 70 से 80 कुत्तों के शव बरामद किए गए। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और आरोपियों की भूमिका की पुष्टि हो सकेगी। इस स्तर पर किसी की सीधी संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है, लेकिन जांच तेज कर दी गई है।
जनवरी 2026 से जारी है कुत्तों की हत्या का सिलसिला
यह मामला अकेला नहीं है। 6 जनवरी 2026 से अब तक तेलंगाना के अलग-अलग जिलों में 900 से ज्यादा आवारा कुत्तों की हत्या की खबरें सामने आ चुकी हैं। इससे पहले कामारेड्डी, हनमकोंडा सहित कई जिलों में भी सरपंचों के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है।
पशु अधिकार संगठनों में भारी आक्रोश
घटना के बाद पशु अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। एक्टिविस्टों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नसबंदी और वैक्सीनेशन जैसे कानूनी तरीकों से किया जाना चाहिए, न कि सामूहिक हत्या के जरिए।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि पशु कानूनों के खुले उल्लंघन का गंभीर उदाहरण मानी जा रही है।













