नई दिल्ली: बॉलीवुड के लोकप्रिय हास्य अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में आखिरकार जेल जाना पड़ा है। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद अभिनेता ने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण कर दिया। यह मामला करीब 15 साल पुराना है, जो उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, वर्ष 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके चलते अभिनेता समय पर कर्ज चुकाने में नाकाम रहे। भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज कराया।
मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए अभिनेता को समझौते का अवसर दिया। हालांकि कोर्ट की राहत के बावजूद राजपाल यादव तय समय पर न तो भुगतान कर पाए और न ही अपने वादों पर खरे उतर सके।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में कई बार नरमी दिखाते हुए मोहलत दी, लेकिन बार-बार की चूक के चलते कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि राजपाल यादव को हर हाल में सरेंडर करना होगा।
अभिनेता की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि उन्हें एक सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दी जाए और वे 50 लाख रुपये की व्यवस्था कर लेंगे, लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लगातार डिफॉल्ट करने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती।
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने स्वयं अदालत को बताया कि वे आदेश का पालन करते हुए तुरंत आत्मसमर्पण करेंगे। इसके बाद उन्होंने जेल में सरेंडर कर दिया।
अब सवाल यह है कि राजपाल यादव आगे सजा काटेंगे या फिर किसी अन्य कानूनी विकल्प का सहारा लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम को उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से वे बॉलीवुड में सक्रिय और लोकप्रिय चेहरा रहे हैं।












