बार काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा को लिखा पत्र
जमशेदपुर: जमशेदपुर के अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने झारखंड राज्य बार काउंसिल चुनाव के लिए 125000 जमानत राशि को अतार्किक बताया है और उन्होंने कहा कि यह निर्धारित कर चुनाव की पात्रता रखनेवाले वंचित समूह तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अधिवक्ताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने का नीतिगत निर्णय है।
उन्होंने बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद को पत्र लिखकर कहा है कि
उपरोक्त वर्णित विषय के आलोक में मेरा साफ मानना है कि झारखंड राज्य बार काउंसिल चुनाव के लिए जमानत की राशि मात्र 125000/- रुपए (एक लाख पच्चीस हजार रुपए) तय करना कहीं से भी व्यावहारिक, तर्कसंगत और तार्किक नहीं है।
आप स्वयं संयुक्त बिहार से संबंधित हैं और भली भांति जानते हैं कि बिहार तथा झारखंड बीमारू एवं गरीब राज्य हैं। आर्थिक पायदान में देश के सबसे गरीब राज्यों में दोनों शामिल है।
यहां यह भी बताना उचित होगा कि राज्य सरकार द्वारा₹5 से ₹10 सरकारी फीस करने पर पूरे झारखंड के वकील सरकार के फैसले के खिलाफ उठ खड़े हुए थे और इसे गरीब लोगों के खिलाफ फैसला बताया।
यह यह भी बताना उचित होगा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड राज्य बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए नए अधिवक्ताओं के एनरोलमेंट के लिए न्यूनतम दर अर्थात ₹1000 से भी कम निर्धारित कर रखी है।
मान्यवर, आप संविधान और कानून विद हैं, हमारा देश लोकतांत्रिक है और संस्थानों में भी लोकतांत्रिक मूल्य और व्यवस्था बनाए रखना नितांत एवं आवश्यक शर्त है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदार एवं सांस्थानिक सदस्यों की भागीदारी संभव हो सके।
झारखंड राज्य बार काउंसिल के पिछले चुनाव में जमानत राशि रुपए मात्र 10000/- ₹ थी। जिसे इस वर्तमान प्रस्तावित चुनाव हजार गुणा बढ़ाकर मात्र 125000/- (एक लाख पच्चीस हजार रुपए) कर दिया गया है, जो पूरी तरह से अव्यावहारिक, अतार्किक, असंगत, असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक है।
यहां स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि झारखंड राज्य बार काउंसिल ने जो जमानत की राशि मात्र 125000/- ₹ तय की है क्या उसने आम सभा आयोजित कर अपने फैसले पर सदस्यों से सहमति प्राप्त की है? मैं यहां साफ बताना चाहता हूं कि बार काउंसिल ने अपने फैसलों पर सदस्यों से स्वीकृति की मुहर नहीं लगवाई है। इससे साफ है कि बार काउंसिल का यह फैसला मनमाना, गैर कानूनी और असंवैधानिक है।
वकील समुदाय की ओर से आपसे आग्रह है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर न्यूनतम से न्यूनतम जमानत राशि तय करने में अपनी भूमिका अदा करें।
इस पत्र की प्रतिलिपि
माननीय मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय, भारत
माननीय मुख्य न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय, रांची।
माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड।
महाधिवक्ता, झारखंड सरकार।
को भेजी गई है।








