रांची: झारखंड विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र को सुचारु, सार्थक और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर सहित लोजपा विधायक जनार्दन पासवान, राजद विधायक सुरेश पासवान और जेडीयू विधायक सरयू राय समेत विभिन्न दलों के कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के प्रारंभ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार की प्राथमिकताओं और सत्र के दौरान प्रस्तावित विधायी एजेंडे पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि शीतकालीन सत्र पूरी तरह जनहित को समर्पित हो और ऐसे निर्णय लिए जाएँ जो राज्य के लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों का समाधान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को मिलकर सकारात्मक वातावरण में काम करने की आवश्यकता है ताकि महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो सकें और नीतिगत फैसले प्रभावी रूप से लागू हों। उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपील की।
वहीं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विपक्ष अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाएगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सदन में विपक्ष को पर्याप्त समय और अवसर मिले। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती देने के लिए सभी आवाजों को सुना जाना चाहिए और विधायी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार की ओर से पूरी कोशिश होगी कि सत्र का संचालन शांति और अनुशासन के साथ हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर सदन की कार्यवाही को प्रभावी और निर्बाध रखा जाएगा।
बैठक में उपस्थित विभिन्न दलों के विधायकों ने भी सत्र को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कई विधायकों ने उम्मीद जताई कि इस सत्र में जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाएँ और क्षेत्रीय समस्याओं पर समुचित चर्चा हो।
विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सभी प्रतिनिधियों के विचारों को सुनने के बाद कहा कि सदन तभी प्रभावी और परिणामकारी बन सकता है जब सभी दल आपसी संवाद के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र को रचनात्मक दिशा देने के लिए अध्यक्षीय पक्ष से हर संभव प्रयास किए जाएँगे।
बैठक का समापन सर्वसम्मति से इस संकल्प के साथ हुआ कि सत्र को शांतिपूर्ण, सकारात्मक और जनहितकारी बनाया जाएगा, तथा सदन की गरिमा और संसदीय मर्यादाओं को सर्वोपरि रखा जाएगा।
शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, स्पीकर ने पक्ष–विपक्ष से सार्थक सहयोग की अपील की














