---Advertisement---

झारखंड स्वास्थ्य विभाग की एक और घोर लापरवाही!एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ाने से पति पत्नी और बच्चा संक्रमित

On: January 21, 2026 10:18 AM
---Advertisement---

चाईबासा:पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया है। सदर अस्पताल में कथित तौर पर संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के बाद एक ही परिवार के पति, पत्नी और उनके बड़े बच्चे के HIV पॉजिटिव हो गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर से निशाने पर आ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

मामला कुछ इस प्रकार है चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से कथित रूप से संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के बाद एक ही परिवार के तीन सदस्य—पति, पत्नी और उनका बड़ा बच्चा—एचआईवी (HIV) पॉजिटिव पाए गए हैं। इस घटना ने जिले के एकमात्र सरकारी ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित परिवार के मुताबिक, जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी चाईबासा सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से कराई गई थी।

प्रसव के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिसके बाद अस्पताल के ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराकर उसे चढ़ाया गया। परिवार का आरोप है कि उसी दौरान महिला को संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे पूरे परिवार को HIV संक्रमण ने अपनी चपेट में ले लिया।

इस मामले की सच्चाई तब सामने आई जब महिला जून 2025 में दूसरी बार गर्भवती हुई। नियमित जांच के दौरान उसकी HIV रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिससे परिवार स्तब्ध रह गया। इसके बाद जब पति की जांच कराई गई तो वह भी संक्रमित पाया गया।

2 जनवरी 2026 को महिला ने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। इसी बीच उनका बड़ा बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ा। जब उसकी जांच कराई गई, तो वह भी HIV पॉजिटिव निकला। इस खुलासे के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया और मानसिक रूप से गहरे सदमे में चला गया।घटना के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है।

पश्चिमी सिंहभूम की सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरती मिंज ने कहा कि फिलहाल केवल आरोपों के आधार पर ब्लड बैंक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को जांच के लिए अस्पताल बुलाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला की डिलीवरी से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड, रक्त चढ़ाने की तारीख, ब्लड डोनर की जांच रिपोर्ट, ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया और ब्लड बैंक की स्क्रीनिंग प्रणाली की गहन समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस घटना ने आम लोगों के बीच सरकारी अस्पतालों और ब्लड बैंकों की विश्वसनीयता को लेकर गहरा भय पैदा कर दिया है। लोग यह सवाल उठाने लगे हैं कि जब सरकारी ब्लड बैंक भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज आखिर किस पर भरोसा करें।

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक विवादों में आया हो। अक्टूबर 2025 में भी इसी ब्लड बैंक से रक्त लेने वाले पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में HIV संक्रमण की पुष्टि हुई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर संदेह खड़े कर दिए हैं।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

Join WhatsApp

Join Now