मुंबई: महाराष्ट्र में युवाओं के कथित कट्टरपंथीकरण से जुड़ी गतिविधियों को लेकर महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने बुधवार को बड़ी और समन्वित कार्रवाई की। खुफिया एजेंसियों से मिली ठोस और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर एटीएस की टीमों ने राज्य के यवतमाल और अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिलों में एक साथ कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ तलाशी अभियान चलाया।
इस कार्रवाई के तहत कुल 21 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन किया गया, जिनमें यवतमाल जिले के पुसद और उमरखेड़ शहरों के 14 ठिकाने शामिल हैं। वहीं अहिल्यानगर जिले में भी सात अलग-अलग जगहों पर एटीएस की टीमें तलाशी में जुटी रहीं। इन ठिकानों में संदिग्धों के आवास, कार्यालय और उनसे जुड़े अन्य परिसर शामिल बताए जा रहे हैं।
14 संदिग्ध हिरासत में
तलाशी अभियान के दौरान एटीएस ने 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी की औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
सर्च ऑपरेशन के दौरान टीमों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इसके साथ ही विभिन्न स्थानों से सीसीटीवी फुटेज भी कब्जे में लेकर उनकी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
खुफिया इनपुट के आधार पर की गई कार्रवाई
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में कुछ युवाओं के कट्टरपंथी संगठनों और विचारधाराओं से जुड़ने को लेकर एटीएस को विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर एटीएस ने जिला पुलिस के सहयोग से यह समन्वित अभियान शुरू किया। अधिकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कुछ दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है। डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा की भी गहन पड़ताल की जा रही है।
पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कार्रवाई को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे। एटीएस और जिला पुलिस की संयुक्त टीमें हर पहलू से मामले की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल एटीएस की यह कार्रवाई राज्य में कट्टरपंथी गतिविधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।














