वाशिंगटन: अमेरिका की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को इस तरह एकतरफा तरीके से दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
यह फैसला खासतौर पर इमरजेंसी पावर्स कानून के तहत लगाए गए उन टैरिफ पर केंद्रित है, जिनके जरिए ट्रम्प प्रशासन ने लगभग पूरी दुनिया के देशों पर भारी ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ थोप दिए थे। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर व्यापार नीति तय करना राष्ट्रपति के संवैधानिक दायरे से बाहर है।
सुप्रीम कोर्ट के बहुमत मत में कहा गया कि टैरिफ जैसे बड़े आर्थिक फैसले लेने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। अदालत के अनुसार, इमरजेंसी पावर्स कानून का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वास्तविक और तात्कालिक खतरों के लिए किया जा सकता है, न कि व्यापक व्यापार नीति लागू करने के लिए।
यह मामला ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे का पहला बड़ा हिस्सा था, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में कोर्ट को कंजरवेटिव दिशा देने के लिए तीन जजों की नियुक्ति की थी, इसके बावजूद यह फैसला उनके खिलाफ गया।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क लगा दिया था। इन टैरिफ का उद्देश्य विदेशी सामान को महंगा बनाकर घरेलू अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देना था।
टैरिफ क्या होता है
टैरिफ का मतलब किसी दूसरे देश से आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाना होता है। इससे विदेशी उत्पाद महंगे हो जाते हैं और देश की घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध भी प्रभावित होते हैं।










