हैदराबाद: प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) की सशस्त्र इकाई पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उसके शीर्ष कमांडर और कुख्यात नक्सली नेता बारसे देवा ने अपने 22 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इसी क्रम में तेलंगाना स्टेट कमेटी (SCM) के वरिष्ठ सदस्य कंकनाला राजी रेड्डी उर्फ वेंकटेश ने भी 26 साथियों समेत हथियार डाल दिए। कुल 48 माओवादियों ने हैदराबाद में सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष सरेंडर किया, जिन पर 1 करोड़ 80 लाख का इनाम था। यह सरेंडर हैदराबाद में सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष किया गया, जिसे नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
48 वर्षीय बारसे देवा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एक गांव का रहने वाला है। वह लंबे समय तक माओवादी संगठन के सबसे सक्रिय और रणनीतिक कमांडरों में शामिल रहा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देवा पर तेलंगाना में 25 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। देवा के साथ राज्य समिति के सदस्य कंकनाला राजी रेड्डी ने भी सरेंडर किया। अब पूरी तेलंगाना राज्य समिति में सचिव दामोदर के रूप में केवल एक शीर्ष नेता बचा है।
सरेंडर के दौरान 48 हथियार और 2,200 राउंड गोलियां बरामद हुईं। इसमें इजरायल निर्मित ‘टेवर’ और अमेरिका निर्मित ‘कोल्ट’ राइफलें शामिल हैं, जो आमतौर पर विशेष बलों के पास होती हैं। तेलंगाना पुलिस के डीजीपी ने इसे ‘PLGA और SCM के अंत’ का संकेत बताया है।
हिडमा का समकालीन, संगठन में दूसरी सबसे बड़ी आदिवासी पहचान
देवा बारसे को कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा का समकालीन माना जाता रहा है। दोनों ने लगभग एक ही समय में माओवादी आंदोलन में प्रवेश किया था और बटालियन स्तर की कई हिंसक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई थी। संगठन के भीतर देवा को दूसरा सबसे प्रभावशाली आदिवासी नेता माना जाता था।
2003 से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय
बारसे देवा वर्ष 2003 में सीपीआई (एमएल) पीडब्ल्यूजी (पीपुल्स वॉर ग्रुप) से जुड़ा था। बाद में संगठन के विलय के बाद वह सीपीआई (माओवादी) का प्रमुख सैन्य चेहरा बन गया। वह सैन्य रणनीति, हथियार निर्माण, विस्फोटक तैयार करने और आईईडी लगाने में विशेषज्ञ रहा है।
हिडमा की मौत के बाद संभाली थी पहली बटालियन की कमान
पिछले वर्ष आंध्र प्रदेश के मारेडुमल्लि जंगलों में हुई मुठभेड़ में माडवी हिडमा के मारे जाने के बाद, बारसे देवा को पीएलजीए की पहली बटालियन का कमांडर नियुक्त किया गया था। उसके नेतृत्व में कई माओवादी अभियानों को अंजाम दिया गया, जिससे सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
कई बड़े हमलों का रहा मास्टरमाइंड
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, देवा कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। उसके आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं, जिससे संगठन की सैन्य क्षमता पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है।
सरेंडर करने वालों को मिलेगा 1.82 करोड़
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 20 माओवादियों को राज्य और केंद्र सरकार की राहत एवं पुनर्वास नीति के तहत कुल 1.82 करोड़ रुपये की पात्र इनामी राशि प्रदान की जाएगी।
सम्मान और सुरक्षा के साथ नया जीवन
तेलंगाना राज्य पुलिस विभाग ने भरोसा दिलाया है कि सभी आत्मसमर्पित कैडरों को सरकार की योजनाओं के तहत सभी अधिकार, आर्थिक सहायता और पुनर्वास लाभ शीघ्र उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मान और सुरक्षा के साथ नया जीवन शुरू कर सकें।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बारसे देवा जैसे बड़े कमांडर का आत्मसमर्पण आने वाले समय में अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर सकता है।










