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साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में बड़ा फैसला, 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा

On: April 7, 2026 10:51 PM
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झारखंड वार्ता संवाददाता

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु के चर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” करार देते हुए कहा कि यह सत्ता के दुरुपयोग और अमानवीय क्रूरता का गंभीर उदाहरण है।

यह मामला वर्ष 2020 में साथानकुलम में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जिसमें 59 वर्षीय व्यापारी पी. जयराज और उनके 31 वर्षीय पुत्र जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

करीब छह वर्षों तक चले ट्रायल के बाद न्यायमूर्ति जी. मुथुकुमारन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हिंसा थी। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच को सही ठहराते हुए माना कि पुलिसकर्मियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जानबूझकर दोनों को गंभीर चोटें पहुंचाईं, जिससे उनकी मौत हो गई।

मामले में कुल 10 पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 9 को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि एक आरोपी की कोविड-19 के दौरान मृत्यु हो चुकी है।

जांच में सामने आया कि लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने के आरोप में 19 जून 2020 को पिता-पुत्र को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद पूरी रात उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों के शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई थी। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों ने सबूत मिटाने और घटना को छिपाने की भी कोशिश की थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून के रक्षक ही जब कानून तोड़ने लगें, तो यह समाज के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है। इसलिए ऐसे मामलों में कड़ी सजा आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह फैसला न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सख्त संदेश भी देता है।

Shubham Jaiswal

“मैं शुभम जायसवाल, बीते आठ वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने विभिन्न प्रतिष्ठित अखबारों और समाचार चैनलों में प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले पाँच वर्षों से मैं साप्ताहिक अखबार ‘झारखंड वार्ता’ से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ। पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं बल्कि समाज और जनता के प्रति एक जिम्मेदारी है, जहाँ मेरी कलम हमेशा सच और न्याय के पक्ष में चलती है।

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